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केदारनाथ यात्रा के लिए खुशखबरी : तप्तकुंड का पुनरुद्धार, फिर फूटी गर्म पानी की धार….

केदारनाथ : बीते वर्ष की अतिवृष्टि के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग पर स्थित गौरीकुंड तप्तकुंड मलबे और विशाल बोल्डरों के नीचे दब गया था। 31 जुलाई को मंदाकिनी नदी के सैलाब से यह ऐतिहासिक स्थल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। लेकिन अब, करीब एक माह की अथक मेहनत के बाद तप्तकुंड का पुनरुद्धार कर दिया गया है। केदारनाथ यात्रा में आने वाले श्रद्धालु अब तप्तकुंड में फिर से आचमन और स्नान का पुण्य लाभ उठा सकेंगे।

तप्तकुंड के पुनर्जीवन के लिए खंड विकास कार्यालय ऊखीमठ को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के निर्देशों पर कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया गया। बीडीओ अनुष्का के मार्गदर्शन और जेई संदीप थपलियाल के नेतृत्व में 30 मजदूरों की टीम ने तप्तकुंड में जमा मलबा और बोल्डरों को हटाने में सफलता हासिल की। ढाई मीटर तक जमा मलबे को हटाने के बाद तप्तकुंड में फिर से गर्म पानी की धार फूट पड़ी है।

अब गर्म पानी को पूर्व में बनाए गए ताल में एकत्र किया जा रहा है, जहां श्रद्धालु केदारनाथ यात्रा के दौरान स्नान कर सकेंगे। गौरीकुंड स्नान कुंड और तर्पण कुंड में भी श्रद्धालु अपने पितरों को तर्पण कर सकेंगे। यात्रा शुरू होने से पहले तप्तकुंड क्षेत्र को और अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाया जा रहा है।

जेई संदीप थपलियाल के अनुसार, तप्तकुंड का गर्म पानी का स्रोत सुरक्षित है और पानी की गर्माहट पहले जैसी ही बनी हुई है। इस पुनरुद्धार कार्य में स्थानीय लोगों का भी भरपूर सहयोग मिला, जिनमें पूर्व ग्राम प्रधान मायाराम गोस्वामी और पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष अरविंद गोस्वामी प्रमुख हैं।

क्यों खास है गौरीकुंड तप्तकुंड?

  • धार्मिक महत्व: केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव पर स्थित तप्तकुंड में स्नान को विशेष पुण्य का फल माना जाता है।
  • पितृ तर्पण का अवसर: गौरीकुंड में तर्पण कुंड भी है, जहां यात्री अपने पितरों का तर्पण कर सकते हैं।
  • प्राकृतिक चमत्कार: अतिवृष्टि और मलबे के बाद भी तप्तकुंड का जलस्रोत सक्रिय रहना एक अद्भुत प्राकृतिक घटना है।

यात्रा से पहले की तैयारी

खंड विकास कार्यालय और स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि केदारनाथ यात्रा शुरू होने तक तप्तकुंड क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित और यात्री अनुकूल बना दिया जाए। इससे यात्रियों को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलेगी, बल्कि वे प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति का भी भरपूर आनंद ले सकेंगे।

 

 

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