Homeराज्यउत्तराखण्डउत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना देवभूमि की अस्मिता का अपमान, अखिलेश...

उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना देवभूमि की अस्मिता का अपमान, अखिलेश यादव मांगे माफी

हरिद्वार : श्री कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि आज भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी एक अलग और सशक्त पहचान स्थापित की है। वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है और देश की बात को गंभीरता से सुना जा रहा है। भारत की बढ़ती शक्ति, प्रतिष्ठा और वैश्विक स्वीकार्यता प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। हालांकि, विपक्ष को देश की इस बढ़ती प्रतिष्ठा और उपलब्धियों की सराहना करने के बजाय इसमें भी राजनीतिक विरोध का अवसर दिखाई देता है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राष्ट्रीय हित और देश की प्रतिष्ठा को राजनीतिक दृष्टिकोण से ऊपर रखकर देखना चाहिए। भारत की उपलब्धियों पर गर्व करना किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश का साझा गौरव है।

उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना देवभूमि की अस्मिता का अपमान

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तराखंड के लोगों के संदर्भ में घुसपैठियों से जुड़ी टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस प्रकार की भाषा का प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान रखने वाली देवभूमि है। यहां की परंपराएं, आस्था, लोकसंस्कृति और सामाजिक जीवन देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां बदरीनाथ, केदारनाथ सहित अनेक प्रसिद्ध तीर्थस्थल स्थित हैं। यह भगवान शिव की तपस्थली और हिमालय की आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी भूमि है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तराखंड का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की दिव्य परंपराओं से भी है। ऐसी पवित्र भूमि के लोगों के लिए घुसपैठिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना उनकी पहचान, सम्मान और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

अखिलेश यादव को पत्नी से भी माफी मांगनी चाहिए

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि अखिलेश यादव को अपनी टिप्पणी पर पुनर्विचार करना चाहिए और इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव का मायका उत्तराखंड में है। ऐसे में उत्तराखंड की पहचान और यहां के लोगों के सम्मान से उनका पारिवारिक संबंध भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस प्रदेश से उनका पारिवारिक रिश्ता जुड़ा है, उस प्रदेश के लोगों के लिए इस तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कितना उचित है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी प्रदेश के लोगों की पहचान, उनकी संस्कृति और उनके सम्मान को राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। देवभूमि के निवासियों की तुलना बांग्लादेशी घुसपैठियों से करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। किसी भी व्यक्ति अथवा समुदाय के बारे में टिप्पणी करते समय तथ्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना आवश्यक है।

एसआईआर को लेकर विपक्ष अपने आरोपों के ठोस प्रमाण प्रस्तुत करे

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के संबंध में विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस द्वारा मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम काटे जाने के आरोपों पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी आरोप को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर परखा जाना चाहिए। यदि विपक्ष यह दावा कर रहा है कि 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, तो उसे इस दावे के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष कम से कम 13 लाख, 13 हजार या 13 ऐसे लोगों के नाम और विवरण सामने लाए, जिनके बारे में यह प्रमाणित किया जा सके कि उनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, उनके पिता का नाम क्या था और बाद में उनका नाम सूची से हटा दिया गया। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता का विवरण, पूर्व मतदाता सूची में दर्ज नाम और संशोधित सूची में नाम हटाए जाने का प्रमाण प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि आरोपों की वास्तविकता की जांच की जा सके।

लोकतंत्र में आरोपों से अधिक महत्वपूर्ण हैं तथ्य और प्रमाण

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को सवाल उठाने और सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक महत्व के विषयों पर किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता प्रमाणों पर निर्भर करती है। मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने जैसा गंभीर आरोप लगाया जाता है, तो उसके समर्थन में सत्यापन योग्य आंकड़े और वास्तविक उदाहरण भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश की प्रतिष्ठा, देवभूमि उत्तराखंड की अस्मिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता जैसे विषयों पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय जिम्मेदार और तथ्यपरक संवाद होना चाहिए। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देशहित, सामाजिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखना प्रत्येक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।

उत्तराखंड की जनता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यों से खुश 

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री के काम से खुश है। उन्होंने कहा कि धामी सरकार की योजनाओं, नीतियों और कार्यशैली का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है तथा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की जनता एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भारतीय जनता पार्टी को अवसर देगी।

Vision Desk 3
Vision Desk 3http://vision2020news.com/
उत्तराखंड ताज़ा समाचार - Vision 2020 News gives you the Latest News, Breaking News in Hindi.Uttarakhand News, Dehradun News, Latest News, daily news, headlines, sports, entertainment and business from Uttarakhand, India.
RELATED ARTICLES
spot_img

Most Popular