प्रदेश में नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों और सदस्यों के शपथ ग्रहण और ग्राम पंचायत की पहली बैठक का कार्यक्रम शासन स्तर से घोषित कर दिया है। यद्यपि यह कार्यक्रम वर्चुअल होना है, फिर भी यह सुनिश्चित किया जाए कि गांवों में कोविड प्रोटोकॉल का अक्षरशः अनुपालन हो। जुलूस, सभा आदि का आयोजन न हो।
▪️ ब्लैक फंगस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मरीजों के समुचित उपचार हेतु सभी जरूरी प्रबन्ध किए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ आमजन को इस संबंध में जागरूक करने की भी जरूरत है। स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए डॉक्टरों से ही परामर्श करें। लापरवाही भारी पड़ सकती है।
▪️सभी जिलों में वेंटिलेटर की उपलब्धता कराई गई है। एनेस्थेटिक और तक टेक्नीशियन की तैनाती भी है। आज से एसजीपीजीआई के समन्वयन में एनेस्थेटिक की ट्रेनिंग भी प्रारंभ हो गई। जिला स्तर के टेक्नीशियन की भी ट्रेनिंग कराई जानी चहिये। सुविधानुसार आईटीआई/स्किल डेवलपमेंट सेंटर से युवाओं का चयन कर उन्हें भी प्रशिक्षण दिलाया जाए।
▪️ कोविड संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके कुछ लोगों को अभी भी चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता पड़ रही है। ऐसे में कोविड उपचार के साथ-साथ पोस्ट कोविड मेडिकल समस्याओं के ट्रीटमेंट के लिए व्यवस्था आवश्यक है। सभी डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में ‘पोस्ट कोविड वार्ड’ तैयार किया जाए। यहां हर बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था हो। इन मरीजों के चिकित्सकीय उपचार के साथ-साथ भोजन के लिए भी समुचित प्रबन्ध किए जाएं।
– प्रदेश के सभी जनपदों में ब्लैक फंगस के उपचार की दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहनी चाहिए। इस सम्बन्ध में भारत सरकार को पत्र भेजकर आवंटन बढ़ाने का अनुरोध किया जाए। मांगपत्र भेजते समय प्रदेश की कुल आबादी और मरीजों की संख्या को दृष्टिगत रखा जाए।
▪️एक जून से सभी 75 जिलों में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों के कोविड टीकाकरण का कार्यक्रम प्रारम्भ हो रहा है। न्यायिक सेवा के लोगों, मीडिया प्रतिनिधियों के अलावा फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर के टीकाकरण हेतु 02-02 केंद्र सभी जिलों में बनाये जाएं। सरकारी कर्मचारी, बैंक कर्मी आदि का टीकाकरण शीघ्रता से कराया जाना चाहिए।
▪️जिन अभिभावकों के बच्चे 12 वर्ष से कम आयु के हैं, उनका टीकाकरण प्राथमिकता के साथ किया जाना आवश्यक है। इस संबंध में विधिवत कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। हर जिले में ‘अभिभावक स्पेशल’ बूथ बनाये जाएं। अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें टीकाकरण के लिए आमंत्रित करें। यह अभिभावक के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा के लिए उपयोगी होगा। इसे अभियान के रूप में संचालित किया जाना चाहिए।
▪️कोविड टीकाकरण पूर्णतः निःशुल्क है, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सभी नागरिकों को निःशुल्क टीका-कवर उपलब्ध कराया जा रहा है। कोरोना वैक्सीनेशन की कार्यवाही व्यवस्थित, निर्बाध और प्रभावी ढंग से संचालित की जाए। जीरो वेस्टेज को ध्यान में रखकर पूरी कार्ययोजना के साथ वैक्सीनेशन की कार्यवाही का प्रभावी प्रबन्धन किया जाए। वैक्सीनेशन का कार्य सुचारु ढंग से सभी वैक्सीनेशन सेंटर पर चलता रहे, इसके लिए एक माह की प्लानिंग पहले से होनी चाहिए। वैक्सीनेशन सेंटर पर वेटिंग एरिया के साथ ही ऑब्जर्वेशन एरिया की व्यवस्था भी होनी चाहिए। वैक्सीनेशन सेंटर पर भीड़-भाड़ न हो, इसके लिए प्लानिंग के साथ जिनका वैक्सीनेशन होना है, उन्हें ही सेंटर पर बुलाया जाए।
▪️ पूरे प्रदेश में स्वच्छता, सैनिटाजेशन एवं फाॅगिंग की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से जारी रखा जाए। इन कार्यों की सूची जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध करायी जाए, जिससे इन कार्यवाहियों के सम्बन्ध में वे आमजन से फीडबैक प्राप्त कर सकें। कम्युनिटी किचन को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए जरूरतमंद व्यक्तियों के साथ ही, मरीजों के परिजनों को भी आवश्यकतानुसार फूड पैकेट उपलब्ध कराए जाएं। कम्युनिटी किचेन की राज्य स्तरीय मॉनीटरिंग हो, इसके लिए इसे वीडियो वॉल से जोड़ा जाना उचित होगा।
टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट के मंत्र के अनुरूप कोरोना के खिलाफ हमारी रणनीति कारगर सिद्ध हो रही है। एक ओर जहां प्रदेश में कोविड टेस्टिंग में हर दिन एक नया रिकॉर्ड बन रहा है, वहीं दैनिक केस में निरंतर कमी आती जा रही है और रिकवरी दर बेहतर होता जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 76,703 एक्टिव कोरोना मरीज हैं। एक्टिव केस में यह कमी अच्छे संकेत देती है। 30 अप्रैल की पीक की स्थिति के सापेक्ष 24 दिन के भीतर मरीजों की संख्या में 75.3 फीसदी की कमी आई है। अब तक 15 लाख 77 हजार 729 लोगों ने कोरोना पर जीत प्राप्त की है। प्रदेश के रिकवरी दर में हर दिन बेहतरी हो रही है। अब यह 94.8% तक पहुंच गया है। विगत 24 घंटों में कोविड संक्रमण के 3,981 केस सामने आए हैं, जबकि इसी अवधि में 11,918 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी हुए हैं।
▪️कोविड टेस्टिंग में उत्तर प्रदेश हर दिन एक नया रिकॉर्ड बना रहा है। बीते 24 घंटे में 03 लाख 26 हजार 399 टेस्ट किए गए हैं। इसमें 01 लाख 27 हजार 404 सैम्पल आरटीपीसीआर के लिए जिलों से भेजे गए हैं। इस तरह प्रदेश में अब तक 04 करोड़ 70 लाख 63 हजार 616 टेस्ट किए जा चुके हैं। इतना टेस्ट करने वाला एक मात्र राज्य उत्तर प्रदेश ही है।
▪️वर्तमान में 47,483 मरीज होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं। कल मात्र 17 एमटी ऑक्सीजन की मांग इन मरीजों की ओर स्व की गई। इन मरीजों से लगातार संवाद बनाए रखा जाए। इनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था को और बेहतर किया जाए। चिकित्सकों की संख्या, फोन लाइन की संख्या में बढ़ोतरी की जरूरत है। निगरानी समितियों के माध्यम से होम आइसोलेशन के मरीजों और जरूरत के अनुसार उनके परिजनों को मेडिकल किट उपलब्ध कराई जाए। मेडिकल किट वितरण व्यवस्था की सतत मॉनीटरिंग की जाए। जनपदीय आइसीसीसी और सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से मरीजों से संवाद कर उन्हें मिल रही सुविधाओं की जांच कराई जाए। वरिष्ठ अनुभवी तथा बुजुर्ग चिकित्सकों को आग्रह के साथ टेलीकन्सल्टेशन कार्य से जोड़ा जाए।
▪️भविष्य की आवश्यकता के दृष्टिगत प्रदेश में ऑक्सीजन प्लांट स्थापना अभियान स्वरूप में की जा रही है। अब तक विभिन्न जिलों में 414 ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत किये गए हैं, इनमें से 51 क्रियाशील हो चुके हैं। जिला प्रशासन इन प्लांट्स के स्थापना कार्य की सतत मॉनीटरिंग करे। रॉ मैटेरियल की उपलब्धता हो अथवा सिविल वर्क समय से पूरे किए जाएं। उत्तर प्रदेश ऑक्सीजन उत्पादन के पैमाने पर आत्मनिर्भर होगा।
▪️लगातार प्रयासों से ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति में संतुलन की स्थिति बन गई है। प्रदेश के सात प्रौद्योगिकी संस्थानों से कराई गई ऑक्सीजन ऑडिट से वेस्टेज रोकने में बहुत सहायता मिली है। विगत 24 घंटे में 628 एमटी ऑक्सीजन वितरित की गई, इसमें 356 एमटी केवल रीफिलर को उपलब्ध कराई गई। ऑक्सीजन उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए औद्योगिक इकाइयों को उनके उपयोग के लिए ऑक्सीजन उपयोग की अनुमति दी जानी चाहिए। औद्योगिक गतिविधियां सामान्य रूप से क्रियाशील रखी जाएं।
▪️यह संतोषप्रद है कि प्रदेश में कोरोना महामारी की आक्रामकता न्यूनतम हो गई है, लेकिन थोड़ी सी भी लापरवाही अब तक के सभी प्रयासों को निरर्थक बना सकती है। हमें लगातार सतर्क और सावधान रहना होगा। आंशिक कोरोना कर्फ्यू को प्रभावी ढंग से लागू रखा जाए।
– विशेषज्ञों के आकलन के दृष्टिगत कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के संबंध में प्रो-एक्टिव नीति अपनाई जा रही है। सभी मेडिकल कॉलेजों में पीआईसीयू और एनआईसीयू की स्थापना को तेजी से पूरा किया जाए। सभी 58 मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड के पीआईसीयू स्थापित किये जाने हैं। इसके साथ 50 बेड का एनआईसीयू भी हो। वर्तमान में 1900 बेड की क्षमता है, इसने 5800 तक बढ़ाया जाना है। यह कार्य शीर्ष प्राथमिकता के साथ किया जाए।
▪️आजमगढ़, बांदा, जालौन सहित ऐसे सभी जिले जहां 300-400 बेड के सरकारी हॉस्पिटल हैं, उनकी क्षमता विस्तार कर न्यूनतम 700-800 बेड के रूप में तैयार किया जाए।
▪️सीएम हेल्पलाइन और आइसीसीसी के माध्यम से कोरोना मरीजों/परिजनों से संवाद बना कर उनकी जरूरतों की पूर्ति कराई जा रही है। अब इसी प्रकार पोस्ट कोविड मरीजों और ब्लैक फंगस की समस्या से ग्रस्त मरीजों/परिजनों से हर दिन संवाद किया जाए। उनकी सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए।
▪️निर्माणाधीन सीएचसी/पीएचसी का कार्य समय से पूरा किया जाए। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर निर्माण कार्य की सतत मॉनीटरिंग कराई जाए। स्वास्थ्य विभाग प्रदेश के सभी जनपदों की सीएचसी और पीएचसी में उपकरणों की मरम्मत, क्रियाशीलता, परिसर की रंगाई-पुताई, स्वच्छता और मैन पावर की पर्याप्त उपलब्धता के संबंध में इस संबंध विशेष कार्यवाही करे। इसके लिए एक विशेष टीम गठित हो, जो इसकी सतत मॉनीटरिंग करे। बेसिक शिक्षा विभाग में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की तर्ज पर स्वास्थ्य और मेडिकल एजुकेशन विभाग में भी अभियान चला कर व्यवस्था सुदृढ़ की जाए। जनप्रतिनिधियों से सहयोग का आग्रह किया जाए। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सतत जारी रखी जाए। सभी जिलों में महिलाओं और बच्चों के लिए पृथक हॉस्पिटल सतत क्रियाशील रहे।


