

केजरीवाल मॉडल के भरोसे आपको मिलेगी जीत !
सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बीच विकल्प बनने के लिए आम आदमी पार्टी कोशिश जद्दोजहद करती नजर आ रही है। पार्टी की प्रदेश ईकाई केजरीवाल मॉडल को उत्तराखंड में भुनाने की कोशिश कर रही है। आपको बता दें कि बीते विधानसभा चुनावों में आमआदमी पार्टी ने दिल्ली में पिछली जीत से भी प्रचंड जीत हासिल की। और ऐसा संभव हो सका केजरीवाल सरकार की जनसरोकारी योजनाओं से । दिल्ली में केजरीवाल ने शिक्षा,स्वास्थ्य,बिजली,और पानी की दिशा में बेहतरीन कदम उठाए। सरकारी स्कूलों हाईटेक और गए, मोहल्ला क्लिनिक से बस्तियों की गरीब जनता को भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं हासिल हुई,सस्ती बिजली और मुफ्त पानी से जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी आसान हो गयी।
उत्तराखंड में केजरीवाल मॉडल कैसे कर सकता है काम …
दिल्ली में हुए इस बदलाव को दिल्लीवासी उत्तराखंडी प्रवासियों नज़दीक से देखा। और उत्तराखंड चुनावों में ये प्रवासी इनफ्लूएंसर साबित हो सकते हैं । वहीं 2022 के रण में पार्टी जहां केजरीवाल मॉडल के साथ तो उतर ही रही है,इसके अलावा रविन्द्र जुगरान संघर्षशील सामाजिक कार्यकर्ता को साथ लेकर पार्टी मजबूत हुई है तो वहीं माना जा रहा है कि कर्नल कोठियाल जैसे रिटायर्ड फौजी और समाजिक कार्यकार्ता भी कल यानि 19 अप्रैल को पार्टी में शामिल हो जाएगें। इसके लिए पार्टी ने बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं। बहरहाल माना जा रहा है कि कोठियाल के पार्टी में शामिल होने से पार्टी को सीधा फायदाहोगा।
कौन हैं कर्नल कोठियाल ?
कर्नल अजय कोठियाल का जन्म 26 फरवरी 1969 को उत्तराखंड मे हुआ था। उनकी पढाई कई स्कूलों मे हुई, क्यूंकि उनके पिता भी फौज मे थे तो जहाँ उनका ट्रांसफर होता,परिवार को भी वही जाना पड़ता था।उन्हें भी बचपन से ही फौज में जाने का शौक था। कर्नल अजय कोठियाल 1992 में चौथी गढ़वाल में बतौर सैन्य अधिकारी शामिल हुए।
1999 मे जब कारगिल की लड़ाई हुयी थी तो वे पहले टीम के कैप्टन थे। फौज में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें कीर्ती चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
वह भारत और नेपाल की कई चोटियों पर पर्वतारोही कर चुके हैं। 2013 मे जब केदारनाथ मे आपदा आयी थी तो उसके पुनर्निर्माण में इन्होने महत्वपूर्ण भूमिका थी।बहरहाल फौज से रिटायर होने के बाद अब वे सामाजिक जीवन में सक्रिय हैं।
यूथ फाउंडेशन की स्थापना

जब 2013 में उनका ट्रांसफर उत्तरकाशी के नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) मे प्रधानाचार्य के रूप मे हुआ।2013 में जब केदारनाथ में आपदा आयी तो वो वहा अपनी टीम के साथ राहत एवं बचाव कार्य में गये। वहां उन्हें कुछ ऐसे युवा मिले, जिन्होंने इस कार्य में काफी मदद किया। इन युवाओं के पास कोई रोजगार नहीं था। तब कर्नल साहब ने उन्ह बेरोजगार युवाओं को ट्रेनिंग देने का निश्चय किया। कुछ समय बाद भर्ती रैली हुई जिसमें अधिकांश सेना में भर्ती हो गए।
तब इससे उत्साहित होकर कर्नल कोठियाल ने इस कार्य को आगे बढ़ाने का विचार किया और यूथ फाउंडेशन ट्रस्ट की नींव रखी। आज प्रदेश के कई जिलों में पर ऐसे प्रशिक्षण कैंप खुले है जो युवाओं प्रशिक्षण देते है युवाओं का पूरा खर्चा फाउंडेशन ही वहन करता है। यहाँ पर युवाओं को सैन्य ट्रेनिंग पारंपरिक तरीकों से दी जाती है। और लिखित परीक्षा की भी तैयारी कराई जाती है।आजतक 20 हजार से भी ज्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी गयी है जिसमे से 12 हजार युवा सेना व अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती हो चुके हैं। कैंप में लड़कियों को भी ट्रेनिंग दी जाती है।
अजय कोटियाल युवाओ को हमेशा सेना मे जाने के लिए प्रेरित करते रहते है शिविरों मे ट्रेनिंग देकर युवाओं को सेना में जाने के लिए तैयार किया जाता है।
फौज के बाद सामाजिक क्षेत्र के बाद कर्नल कोठियाल ने राजनीति में भी उतरने की कोशिश की । बीते लोकसभा चुनावों में माना जा रहा था कि भाजपा कोठियाल को पौड़ी से उतार सकती है। हलांकि कि ऐसा न हुआ ।
A.K और A.K की जोड़ी से AAP को उम्मीद


साफ और उम्दा छवि वाले अजय कोठियाल(A.K) कल आम आदमी पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। कोठियाल के साथ और केजवरीवाल मॉडल के बल पर आम आदमी पार्टी सत्ता पर काबिज हो सकेगी या नहीं ये देखना काफी दिलचस्प होगा ।



