वाराणसी- तथागत की तपोस्थली सारनाथ में दुनिया भर से पर्यटक आते है।आशापुर रेलवे क्रासिंग बंद होने से अक्सर जाम लगा रहता है। इस रेलवे ओवर ब्रिज के बन जाने से घंटो लगने वाला जाम खत्म हो जायेगा। इस आरओबी करीब 98 प्रतिशत काम हो चुका है। अब केवल फ़िनिशिंग व टेस्टिंग का काम बचा है। यह पुल क़रीब 50.17 करोड़ रुपए की लगात से बन रहा है।जिसका उद्धघाटन जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करने की सम्भावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के चौतरफ़ा विकास के लिए कई योजनाओं की शुरआत की थी। इन योजनाओं की लगातार निगरानी सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ करते चले आ रहे हैं। जिसका नतीज़ा है कि वाराणसी में करोड़ो की चल रही योज़ना गुणवक्ता के साथ पूरी हो रही है। वाराणसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी ,जाम से छुटकारा दिलाना। आशापुर आरओबी बन जाने से इस क्षेत्र में जाम की समस्या पूरी तरह ख़त्म हो जाएगी। रेलवे क्रॉसिंग के अक्सर बंद होने से गाड़ियों की लम्बी कतार लग जाती थी।सारनाथ का इलाका इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ भगवान बुद्ध ने पहली बार उपदेश दिया था। बौद्ध भिक्षुओं के लिए ये जगह किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं हैं ।सारनाथ में पूरी दुनिया से रोज़ाना हज़ारों की संख्या में बौद्ध अनुयाई आते है। आशापुर आरओबी यातायात के लिए इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं रास्ता आगे चलकर रिंग रोड में जुड़ जाता है ,जो गाजीपुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, समेत पूर्वांचल के कई जिलों में ले जाता है। जो आगे चलकर नेपाल की सरहद तक जाता है।नेपाल के लुम्बनी में जहाँ भगवान बुद्ध पैदा हुए थे, वहाँ से बुद्ध के प्रथम उपदश स्थली सारनाथ को भी ये रास्ता जोड़ता है।
राज्य सेतु निगम के सहायक अभियंता ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया की करीब 682 मीटर लम्बे ,3 लेन की आरओबी का लगभग 98 प्रतिशत का पूरा हो चूका है। फ़िनिशिंग का काम चल रहा है। साथ ही ब्रिज के लोड टेस्टिंग का काम भी हो रहा है। 20 ऐ 25 अप्रैल तक सभी कामो के पूरे हो जाने की सम्भावना है। इस पुल के निर्माण का काम जून 2018 में शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि जल्दी ही वाराणसी को और भी रेलवे ओवर ब्रिज मिल जायेगा जिससे यहाँ की जाम की समस्यों से लोगों को निजात मिलेगा।



