देहरादून- आज से पितृ पक्ष शुरु हो गया है। पितृ पक्ष में मृत आत्माओं का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। श्राद्ध में वर्तमान पीढ़ी अपने पित्रों को अपनी श्रद्धा के साथ पूजते हैं। वैदिक दर्शन के अनुसार श्राद्ध का सबसे मुख्य तत्व है श्रद्धा जो प्रेम और विश्वास और समर्पण भाव के साथ दिखाई जाती है। मान्यता है कि गंगा तट में किए गए श्राद्ध से तर्पण का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगा तटों पर आज सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग अपने पित्रों के श्राद्ध तर्पण के लिए पहुंच रहे हैं और धार्मिक रीति के अनुसार श्राद्ध दे रहे हैं। हरिद्वार पितृ तीर्थ और मुक्ति का बड़ा केंद्र माना जाता है। कुशावर्त घाट और नारायणी शिला मंदिर हर साल लाखों लोग श्राद्ध करना आते हैं। नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी का कहना है कि हर व्यक्ति को क्षमतानुसार अपने पित्रों के लिए तर्पण करना चाहिए लेकिन यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि श्रद्धा से दिया गया तर्पण ही श्राद्ध माना जाता है। उन्होंने बताया कि दिवंगत पूर्वज वैसे तो वर्ष भर पितृ लोक में रहते हैं और वर्ष भर में पंद्रह दिन मृत्युलोक यानि धरती में आते हैं। इन्हीं पंद्रह दिनों में अपने-अपने पूर्वजों को याद किया जाता है और तर्पण किया जाता है। ऋषिकेश के गंगा घाटों पर भी बड़ी संख्या में लोग पितरों के श्राद्ध तर्पण के लिए पहुंच रहे हैं।