इंटरनेशनल टाइगर डे: उत्तराखंड में बढ़ी बाघों की संख्या, कार्बेट टाइगर रिजर्व पहले स्थान पर, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा – “वन हैं तो बाघ हैं और बाघ हैं तो वन हैं।“

देहरादून- उत्तराखंड में बाघों की संख्या बढ़ी है। राज्य में इनकी संख्या में 102 का इजाफा हुआ है। अब इनकी संख्या 442 पहुंच गई है। आज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखिल भारतीय बाघ आंकलन 2018 के नतीजे जारी किए।
जिसमें क्षेत्रफल के घनत्व के हिसाब से उत्तराखंड पहले नंबर पर है। सभी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या के लिहाज से कार्बेट टाइगर रिजर्व पहले स्थान पर है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि उत्तराखंड जैव विविधता, पर्यावरण व वन्य जीव संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध है। ऑल इंडिया टाईगर एस्टीमेशन 2018 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में उत्तराखंड में 227 बाघ थे जो कि वर्ष 2014 में 340 व वर्ष 2018 में बढकर 442 हो गए हैं। वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग डिक्लेरेशन में वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया था। परंतु भारत ने यह लक्ष्य चार साल पहले ही हासिल कर लिया। इसमें उत्तराखंड का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन व वन्य जीवन का संरक्षण उत्तराखंड की संस्कृति में है। बाघ फूड चैन में सबसे ऊपर हैं। बाघ पारिस्थितिक तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। कहा भी गया है कि “वन हैं तो बाघ हैं और बाघ हैं तो वन हैं।“

वर्ष———संख्या
2018———442
2014———340
2010———227
2016———179

 

 

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