
देहरादून- उत्तराखंड शासन ने सभी जिलाधिकारियों को मानसून से पहले आपदा प्रबंधन से संबंधित सभी तरह की तैयारियों करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में 29 बिंदुओं की एक एडवाइजरी जारी की गई है। जिसमें उन्हें बाढ़, भूस्खलन के संभावित खतरे वाले संवेदनशील स्थानों के चिन्हीकरण और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में सतर्कता और खतरे से निपटने के हर तरह के उपायों की तैयारी रखने को कहा गया है। सचिव आपदा प्रबंधन अमित सिंह नेगी ने ये एडवाइजरी जारी की है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठकों का आयोजन करें। इन बैठकों में आपदा प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए। इसका कार्यवृत्त शासन को उपलब्ध कराया जाए। जनपदों में प्राथमिकता के आधार पर भूस्खलन, बाढ़ से संबंधित संवेदनशील स्थानों के चिन्हीकरण, मानसून के दौरान आपातकालीन परिचालन केंद्रों की स्थापना और बाढ़ नियंत्रण केंद्रों को 24 घंटे सक्रिय रखने पर भी जोर दिया गया है।
बाढ़ के मद्देनजर विशेष रूप से प्रभावित होने वाले जिलों हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और देहरादून में बाढ़ सुरक्षा से संबंधित तैयारी की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बागेश्वर का कपकोट, पिथौरागढ़ जिले का धारचूला व मुनस्यारी, रुद्रप्रयाग जिला, उत्तरकाशी जिले के मोरी, नैटवाड़, चमोली जिले में चमोली व बूढ़ा केदार आदि संवेदनशील स्थानों में भूस्खलन प्रभावित राजमार्ग के वैकल्पिक मार्ग को वन विभाग के साथ समन्वय करने को कहा गया है। जिले व मंडल स्तर पर आपदा के दौरान एसडीआरएफ, सेना, आइटीबीपी, एसएसबी, पीएसी व अन्य पैरामिलिट्री दलों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। सचिव ने अन्य सभी आवश्यक बिंदुओं पर भी पहले से तैयारी रखने की हिदायत दी है।