उत्तराखंड- जम्मू कश्मीर के राजौरी में माइन ब्लास्ट की चपेट में आने से उत्तराखंड के दो लाल सुरजीत सिंह राणा और 8 कुमाऊं रेडीमेंट के जवान लांस नायक सूरज सिंह शहीद हो गए। सूरज, पुत्र नारायण सिंह अल्मोड़ा के जिगोनी तहसील के रहने वाले थे। शहीद सुरजीत, पुत्र स्वर्गीय प्रेम सिंह राणा चमोली के स्यूंण गांव के रहने वाले थे। जो 10वी गढ़वाल में सेवारत थे। रजौरी में अभियान के दौरान माइन ब्लास्ट की चपेट में आने से मौके पर ही शहीद हो गए। आज शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा। स्यूंण गांव निवासी सुरजीत सिंह वर्ष 2008 में सेना में शामिल हुए थे। वह इन दिनों जम्मू की अखनूर तहसील के पलावाला सेक्टर में तैनात थे। शनिवार को हुए अभ्यास सत्र के दौरान एक धमाके में वह शहीद हो गए। उनके पिता प्रेम सिंह की मौत दो दशक पूर्व हो गई थी, जबकि एक वर्ष पहले शहीद की पत्नी की भी मौत हो गई थी। इस घटना की सूचना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां विशेश्वरी देवी बेटे की मौत की सूचना के बाद से बदहवास पड़ी हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी सुरजीत के कंधे पर ही थी और वह कुछ समय पहले ही छुट्टी लेकर गांव आया था।
वहीं आठ कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात पालड़ी गांव के सूरज सिंह भाकुनी शनिवार शाम एक धमाके में जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में शहीद हो गए। सूरज सिंह की शहादत की खबर सुनते ही गांव और आसपास के क्षेत्र में मातम छा गया। सूरज नवंबर में एक माह की छुट्टी पर घर आए थे और एक हफ्ते पहले ही 25 नवंबर को डयूटी पर लौटे थे। वह सूरज पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर के और अविवाहित थे। सात जुलाई 1995 को भनोली तहसील के पालड़ी में गांव में नारायण सिंह भाकुनी और सीता देवी के घर जन्मे सूरज सिंह ने बचपन से ही सेना में जाने का मन बना लिया था। इंटरमीडिएट तक की परीक्षा गांव में करने के बाद सूरज बीए की पढ़ाई के लिए अल्मोड़ा आ गए थे। एसएसजे परिसर में बीए की पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2014 में उनका आर्मी में सेलेक्शन हो गया। रानीखेत में ट्रेनिंग लेने के बाद सूरज की पहली ज्वॉइनिंग जम्मू के उड़ी सेक्टर में हुई। फिर बटालियन तीन साल लखनऊ में रही। इधर, एक साल पहले ही बटालियन जम्मू आ गई थी। सूरज इस साल एक-एक माह की छुट्टी लेकर दो बार घर आ चुके थे। इस बीच एक माह की छुट्टी काटकर वह 25 नवंबर को बटालियन लौटे थे। वहां जाने के बाद ही वह शहीद हो गए। सूरज सिंह की शहादत की खबर गांव में सबसे पहले उनके चाचा महासिंह को मिली। बटालियन के अधिकारियों ने बाद में उनके पिता को भी जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद गांव में भी शोक की लहर छा गई। दोनों का पार्थिव शरीर सोमवार को यानि आज उनके गावं लाया जाएगा। उसके बाद राजकीय सम्मान और सैन्य सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी जाएगी।