Homeराज्यउत्तराखण्डउत्तराखंड का मौलिक स्वरूप बना रहे उत्तरांचल उत्थान परिषद का मौलिक प्रयास

उत्तराखंड का मौलिक स्वरूप बना रहे उत्तरांचल उत्थान परिषद का मौलिक प्रयास


देहरादून। 1988 में स्थापित उत्तरांचल उत्थान परिषद अपने स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण कर चुका है। उत्तरांचल के विकास में संगठन का विशेष महत्व है। अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का उत्तरांचल उत्थान परिषद महत्वपूर्ण उपक्रम है। यह विचार संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष समाज सेवी प्रेम बड़ाकोटी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं व्यवस्था की सूत्रधार हैं। परंपराएं विकसित होती रहें और उत्तराखंड का मौलिक स्वरूप बना रहे। यह हमारी कार्यशैली का अंग है। श्री बड़ाकोटी ने कहा कि 1989 में उत्तरांचल उत्थान परिषद का संविधान बना। जिसमें तीन वर्ष के चुनाव का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि इसे पूर्व गढ़वाल कल्याण संस्था इस कार्यकम में निरंतर प्रयासरत है, जो आज बहुत क्रियाशील नहीं है। उस संस्था में भी डॉ. नित्यानंद, श्रीमान जितेंद्र गोयल, डॉ. दिनेश गुप्ता जैसे विशिष्ठ लोगों की महत्वपूर्ण सेवाएं रहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तरांचल उत्थान परिषद का कार्य कार्यकर्ता की योग्यता और क्षमता से बढ़ रहा है जो अपने आप में प्रभावकारी उपलब्धि है। इस अवसर पर उत्तरांचल उत्थान परिषद की वार्षिक पत्रिका हिमांजलि के स्वरोजगार विशेषांक का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।
तीन सत्रों में सम्पन्न उत्तरांचल उत्थान परिषद सभा की आम बैठक सेवा निकेतन हरिद्वार मार्ग के सभा कक्ष में सम्पन्न हुई, जिसमें मंचासीन अतिथियों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक देवेंद्र, अध्यक्ष प्रेम बड़ाकोटी, आजाद सिंह रावत, डॉ. माधव मैठाणी, दयानंद चंदोला तथा शशिकांत दीक्षित उपस्थित थे। कार्यक्रम में महामंत्री राम प्रकाश पैन्यूली द्वारा अपनी आख्या प्रस्तुत की गई। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि परिषद द्वारा 115 ग्रामों मेें ग्रामोत्सव आयोजित किए गए तथा 10 हजार से अधिक पौधे रोपे गये। इस अवसर पर भिगुन ग्रामोत्थान प्रकल्प के हिमांशु पैन्यूली, सेवा निकेतन हल्द्वानी के मनोज पाठक, घनसाली के डॉ. सुशील कोटनाला, डोटी के राजेश विश्वकर्मा, बछेती के गोविंद मैठाणी, माखटी-पोखरी प्रधानाचार्य नरदेव सिंह ने अपने-अपने प्रकल्पों की जानकारी आम सभा को दी, जबकि उत्तरांचल उत्थान परिषद के कोषाध्यक्ष नीरज मित्तल द्वारा आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में जो प्रमुख लोग उपस्थित थे उनमें विश्व संवाद केंद्र निदेशक विजय कुमार, डॉ. आर एस रावत, डॉ. नवदीप जोशी, डॉ. विजय पांडे, महेंद्र, सूर्यमणि, जयमल नेगी, आनंद रावत, राजेश थपलियाल, संजय बड़ोनी समेत दर्जनों विशिष्ठ लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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