
जैसा कि हम सब जानते हैं हिन्दू धर्म में 33 कोटि देवी- देवता हैं. लेकिन सभी देवी-देवताओं में ‘आदि शक्ति’ सबसे शक्तिशाली और सबसे उच्च पद्वी पर हैं, ऐसा माना जाता है। शक्ति के कई सारे रूप हैं, जिनमें से एक हैं ‘मां लक्ष्मी’।
मां लक्ष्मी के बारे में कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनके बारे में शायद बहुत कम लोग ही जानते हैं। उनका स्वरूप, वे किस सवारी पर बैठती हैं, इत्यादि से जुड़े कुछ तथ्य ऐसे हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं। देवी लक्ष्मी का एक नाम कमला है क्योंकि यह कमल के आसन पर विराजमान होती हैं। इनके हाथों में कमल का पुष्प भी है। योतिष की मानें तो देवी लक्ष्मी के कमल के पुष्प पर विराजमान होने का कारण यह है कि इनका जन्म सागर से हुआ माना जाता है। जल क्षेत्र से उत्पन्न होने के कारण इनका प्रिय फूल भी वही है जो जल से उत्पन्न हुआ है।

देवी लक्ष्मी पर जल बरसाता हुआ हाथी अन्न धन और समृद्धि को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि हाथी लक्ष्मी को समृद्ध बना रहा है। क्योंकि प्राकृति रूप से लक्ष्मी कृषि का स्वरूप मानी जाती हैं जबकि सांसारिक तौर पर यह समृद्धि की प्रतीक हैं। लक्ष्मी के इस स्वरूप की पूजा किसानों के लिए समृद्धि दायक माना गया है।
देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू तो है ही साथ ही देवी लक्ष्मी का वाहन हाथी भी है। इसका कारण यह है कि पशुओं में हाथी एक ऐसा जीव है जो शेर के बीच भी अपनी मस्त चाल में चलता है।
हाथी को गणेश जी का भी स्वरूप माना जाता है जो शुभता को दर्शाता है यानी जहां शुभ कर्म होंगे वहां लाभ भी होगा, लक्ष्मी भी होगी। लक्ष्मी के साथ हाथी दर्शाता है कि जहां शुभ कर्म होंगे वहां लक्ष्मी भी होगी।

देवी लक्ष्मी की बड़ी बहन अलक्ष्मी हमेशा देवी लक्ष्मी के साथ होती है। इसलिए जहां सिर्फ लक्ष्मी का वास होता है वहां धन तो होता है लेकिन सुख शांति नहीं होती है। इसलिए कहा जाता है कि लक्ष्मी के साथ विष्णु की भी पूजा की जानी चाहिए क्योंकि विष्णु के होने पर अलक्ष्मी दूर रहती है। कारण यह है कि विष्णु बौद्धिक योग्यता और धैर्य के प्रतीक हैं। यानी धन आने पर धैर्य और बुद्धि नहीं खोनी चाहिए।





