Homeअध्यात्मदून की आन- बान-शान "झंडा साहिब"......

दून की आन- बान-शान “झंडा साहिब”……

 

देहरादून : आस्था का प्रतीक झंडा साहिब प्रत्येक वर्ष एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है माना जाता है कालांतर में झंडा मेला की शुरुआत हुई थी. झंडा साहिब एक ऐसा मेला है जो इंसानियत को जोड़ता है, श्रद्धालुओं की मौजूदगी और गुरु महाराज के जयकारों के बीच झंडेजी चढ़ाए जाते हैं । तड़के से ही दरबार साहिब और उसके आसपास के काफी बड़े क्षेत्र में आस्था का सैलाब उमड़ने लगता है । परिसर में सुरक्षा का कड़ा बन्दोबस्त किए जाते हैं।

बता दें कि दरबार साहिब के श्रीमहंत देवेंद्र दास के मार्गदर्शन में झंडेजी को यथास्थान अधिष्ठापित किए जाने के साथ ही देहरादून का 300 साल से भी ज्यादा पुराना ऐतिहासिक झंडा मेला आरंभ हो गया। बता दे कि सुबह आठ बजे सबसे पहले पुराने झंडेजी को उतारने की प्रक्रिया होती है। इसके बाद 90 फीट ऊंचे नए झंडेजी को पंचामृत से स्नान कराया जाता है । स्नान के पश्चात पहले सादे और फिर शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया होती है। इस अविस्मरणीय क्षण के गवाह बनने के लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली समेत कई राज्यों के साथ ही विदेशों से भी संगत कई दिन पहले से दून पहुंचने लगती है।

श्री गुरु राम राय के जन्मदिवस के रूप में हर साल दरबार साहिब में झंडा मेला आयोजित किया जाता है। उनका जन्म पंजाब के कीरतपुर (जिला होशियारपुर) में वर्ष 1646 को होली के पांचवें दिन हुआ था। वर्ष 1676 में श्री गुरु राम राय ने दून में डेरा डाला था और लोक कल्याण के लिए विशाल ध्वज स्थापित किया था। तब से अनवरत होली के पांचवें दिन झंडेजी का आरोहण होता है।

एक महीने तक चलता है मेला : झंडेजी के आरोहण के साथ ही झंडे मेले का शुभारंभ हो जाता है। दरबार साहिब परिसर व आसपास अस्थायी दुकानें व झूले लगाए जाते हैं। यह मेला करीब एक महीने तक चलता है।

 परंपरानुसार झंडेजी के आरोहण के तीसरे दिन नगर परिक्रमा लगाया जाता है। महंत की अगुवाई में हजारों श्रद्धालु दरबार साहिब से पैदल निकलते हैं। इसी के साथ पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली से पहुंची संगतों का लौटना शुरू हो जाता है।

तालाब में लगाई जाती है पुण्य की डुबकी:  एक तरफ झंडेजी का आरोहण होता है तो दूसरी ओर काफी श्रद्धालु तालाब श्री दरबार साहिब में पुण्य की डुबकी भी लगाते हैं ।  देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु तालाब के किनारे बच्चों का मुंडन करवाते हैं।

झंडेजी का आरोहण :  श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ जुटती है कि हर किसी के लिए झंडेजी के आरोहण को साक्षात देखना संभव नहीं हो पाता। इसलिए दरबार साहिब प्रशासन की ओर से परिसर में बड़ी स्क्रीन लगाई जाती है और इस पर सुबह से ड्रोन व अन्य कैमरों से पूरी प्रक्रिया को लाइव दिखाया जाता है।

जगह-जगह होते हैं भंडारे : पंजाब-हरियाणा से आई संगत के साथ-साथ स्थानीय लोग भी जगह-जगह भंडारों का आयोजन करते हैं। शिवाजी धर्मशाला से लेकर सहारनपुर चौक तक भंडारों लगाये जाते हैं जिसमे तरह-तरह के व्यंजन प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं।

 श्री झंडा मेला प्रेम, सद्भावना, आपसी भाईचारा, सौहार्द, उल्लास और अमन-चैन का संदेश देता है। झंडेजी पर शीश नवाने से सभी की मन्नतें पूरी होती हैं। यही वजह है कि श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है। तमाम संगत के साथ देहरादून और देवभूमि पर श्री गुरु राम राय की कृपा व आशीर्वाद हमेशा बना है।

मान्यता:  माना जाता है कि जब झंडेजी आपने स्थान पर विराजमान होते हैं, तभी दूर आकाश में एक बज आता है और झंडे जी का परिक्रमा कर गायब हो जाता है.

दरबार साहिब के श्रीमहंत

  • श्रीमहंत औददास – 1687-1741,  
  • श्रीमहंत हरप्रसाद – 1741- 1766
  • श्रीमहंत हरसेवक- 1766- 1818
  • श्रीमहंत स्वरूपदास -1818- 1842
  • श्रीमहंत प्रीतम दास – 1842- 1854
  • श्रीमहंत नारायण दास  -1854- 1885
  • श्रीमहंत प्रयाग दास -1885- 1896
  • श्रीमहंत लक्ष्मण दास- 1896- 1945
  • श्रीमहंत इंदिरेशचरण दास- 1945- 2000
  • श्रीमहंत देवेंद्र दास -2000- गद्दीनशीन
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