
आज के दौर में जहाँ खून के रिश्ते भी अपने कर्तव्यों से मुंह फेर लेते हैं आये दिन कितनी ही खबरें सामने आती हैं कि सगे बेटे ने माता पिता को घर से निकल दिया, सगे पिता या भाई ने ही भाई को या बेटे को मौत के घाट उतर दिया वहीं दूसरी ओर एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने एक बार फिर इंसानियत कायम की है. धर्म के नाम पर खून बहाने वालों के लिए मोइनुद्दीन और उसके हिन्दू बेटे की कहानी ने समाज में एक मिसाल पेश की है. यहाँ ना तो खून का रिश्ता है और ना ही धर्म का फिर भी मुस्लिम पिता ने इस रिश्ते को बखूबी निभाया.
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक मुस्लिम परिवार ने हिंदू लड़के को तब गोद लिया था, जब वह 12 साल का था।यही नही उसकी शादी भी रीति-रिवाज से ही कराई।