
काफल सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि कई ऐसी बीमारियों की दवा है। हाल ही में अमेरिका की कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने काफल पर कुछ शोध किए हैं। इन शोधों में कुछ ऐसी बातें निकलकर सामने आई हैं कि आप भी हैरान रह जाएंगे। खास तौर पर हम उत्तराखंडियों का ये समझना जरूरी है कि आखिर काफल किस तरह से हमारी जिंदगी के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

ये पेड़ अनेक प्राकृतिक औषधीय गुणों से भरपूर है। दांतून बनाने और अन्य चिकित्सकीय कार्यां में इसकी छाल का उपयोग होता है। इसके अतिरिक्त इसके तेल और चूर्ण को भी कई तरह की दवाओं के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में इसके अनेक चिकित्सकीय उपयोग बनाए गये हैं। आयुर्वेद में इसे कायफल के नाम से जाना जाता है! इसकी छाल में मायरीसीटीन,माय्रीसीट्रिन एवं ग्लायकोसाईड पाया जाता है विभिन्न शोध इसके फलों में एंटी-आक्सीडेंट गुणों के होने की पुष्टी करते हैं जिनसे शरीर में आक्सीडेटिव तनाव कम होता तथा हृदय सहित कैंसर एवं स्ट्रोक के होने की संभावना कम हो जाती है।
इसमें विटामिन सी, खनिज लवण, प्रोटीन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन और मैग्निशीयम होता है। यही नहीं काफल की छाल को उबालकर तैयार द्रव्य में अदरक और दालचीनी मिलाकर उससे अस्थमा, डायरिया, टाइफाइड जैसी बीमारियों का इलाज भी किया जाता है। ये वो गुँ हैं जो रिसर्च में सामने आए हैं। इसलिए हमें काफल के महत्व को समझना चाहिए। खबर अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें.


