देहरादून में वेली ऑफ़ वॉर्ड्स द्वारा आयोजित इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टीवल में एडीजी अशोक कुमार द्वारा लिखित पुस्तक “ख़ाकी में इंसान” के बारे में चर्चा की गयी। लोगों द्वारा अशोक कुमार को उनकी इस पुस्तक के लिए बधाई दी गई, साथ ही मोजूद सभी गणमानय व्यक्तियों द्वारा उनसे पुलिस की कार्य प्रणाली, मित्र पुलिस के श्लोगन, विवेचनाओं में सुधार,पुलिस जवानो के लिए विभाग द्वारा सुधार हेतु कार्य, उत्तराखंड पुलिस के कार्य करने के तरीक़ों के बारे में व पुस्तक से सम्बंधित सवाल किए गए।
जिनका उत्तर देते हुए अशोक कुमार ने कहा कि अच्छी पुलिस व्यवस्था से सचमुच गरीब व असहाय लोगों की जिन्दगी में फर्क लाया जा सकता है। यद्यपि वर्तमान व्यवस्था में कुछ खामियाँ आ गई हैं फिर भी यदि ऊँचे पदों पर बैठे लोगों में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, इंसानियत के नजरिए से सोचने की क्षमता हो और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो यही व्यवस्था, यही सिस्टम लोगों की मदद करने में बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है। साथ ही कहा कि यदि हम काम न करने के 50 तरीके अपना सकते हैं तो काम करने के भी 50 रास्ते खोज सकते हैं। बस जरूरत है अपने को साहब न समझकर जनसेवक समझने की और पीड़ित की दृष्टि से काम करने की।
उन्होंने कहा कि त्यौहार में जब लोग परिवार के साथ खुशियां मना रहे होते है, वीकेंड्स पर छुट्टियां का मजा ले रहे होते है, तब खाकी पहने पुलिसकर्मी पूरी मुस्तैदी से सड़क पर ड्यूटी दे रहा होता है। पुलिसकर्मी हर उस खास मौके पर अपने घर और परिवार से दूर रहता है। उनके मुताबिक हफ्ते के सातो दिन 24 घंटे की ड्यूटी, मेहनत के बावजूद कई बार उसे दुत्कारा और अपमानित भी किया जाता है। लेकिन हमें खाकी के पीछे रहने वाले इंसान और उसकी भावनाओ का भी सम्मान करना चाहिए।