Thursday, February 26, 2026
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-60 Degree में कैसे जिंदा रहते हैं ये लोग, जानें!

आज कल सर्दियों का मौसम शुरू हो चूका है और जरा सी ठंडी हवा चलने पर लोग भरी गर्म कपड़ो का या हीटर का सहारा ले रहे हैं, यहां पर कोहरा गिरता है और ठंडी हवाएं चलती हैं तो लोगों की हालत खराब हो जाती है. लोग अपने घरों में ब्लोअर, हीटर और न जाने क्या इस्तेमाल करने लगते हैं. लेकिन जहां हम रहते हैं वहां का तापमान शायद ही 0 से नीचे कभी कभार ही जाता है. लेकिन वहीं तापमान – में चला जाए तो क्या होगा शायद हम कल्पना भी नहीं कर सकते.
क्या आप जानते हैं धरती के जिस छोर पर सूरज की गर्मी नहीं पहुंचती , वहां का तापमान -60 Degree से भी नीचे चला जाता है. लेकिन इसके बाद भी वहां जीवन है सुनकर अजीब लग रहा होगा लकिन सच है. ऐसी ही एक जगह है वर्खोयांस्क जो कि साखा रिपब्लिक, रसिया के वर्खोयांस्की जिले में स्थित है.

कैसे जीते हैं जिंदगी –
यहां लोग ज्यादातर मांस ही खाते हैं और सबसे ज्यादा मछली. इसे फ्रीज करके लंबे समय तक रखा जा सकता है. सबसे बड़ी बात ये है कि वहां के लोग इसे कच्चा ही खा लेते हैं. इसे नमक और काली मिर्च के साथ सर्व किया जाता है.बता दे कि दुनिया में सबसे कम तापमान होने के कारण इस शहर का नाम गिनीज बुक में दर्ज है, ठंड के मौसम में यहां का न्यूनतम तापमान -67.5 Degree दर्ज किया जा चुका है और गर्मियों -37.4 Degree सेल्सियस.

पीने का पानी
पीने के लिए साफ बर्फ को काटा जाता है और इसे घरों में स्टॉक करके रख लिया जाता है. जब भी पानी पीना होता है तो ये बर्फ के ब्लॉक को घर में ही गर्म करके पिघला लेते हैं.
कम तापमान का असर गैजेट्स पर भी पड़ता है. इसीलिए यहां बैट्री बहुत कम बैकअप देती हैं. कलम की स्याही लिखने के पहले ही सूख जाती है और मेटल ग्लास पहनना हानिकारक हो जाता है.
हैरानी वाली बात यह है कि यहां रहने वाले लोग अपनी गाड़ियों को दिनभर स्टार्ट रखते हैं. ऐसा वो इसलिए करते हैं क्योंकि अगर एक बार गाड़ी बंद हो गई तो वो दोबारा स्टार्ट नहीं होगी.                                                    यहां के जानवर भी इस माहोल के लिये विकसित हो गए हैं. आपको यहां के घोड़ों और कुत्तों के शरीर पर फर दिखाई देंगे. यहां मिलने वाले याकुट घोड़े आकार में छोटे होते हैं, उनमें ठंड के बचने की अधिक क्षमता होती है.                 इस इलाके में आने के लिए विमान की टिकट काफी महंगे हैं. यहां एक बार आने-जाने में सैंकड़ों पाऊंड खर्च होते हैं. सोवियत युग का एनटोव एएन-24 विमानों का अभी भी यहां पर इस्तेमाल किया जाता है.

 

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