
कहने को शिया और सुन्नी दोनों ही इस्लामी ही हैं परंतु फिर भी शिया और सुन्नियों के झगड़े जगजाहिर हैं। ये विवाद इस्लामी इतिहास का सबसे पुराना विवाद है, धर्म एक है, रीति रिवाज भी एक ही हैं लेकिन झगड़े शताब्दियों पुराने हैं।
उत्तराधिकार को लेकर झगड़ा
बड़ी ही हैरानी वाली बात है कि इस विवाद की शुरुआत 632 ईसवी में पैगंबर मोहम्मद की मृत्यु के बाद हुई। उन्होंने अपना उत्तराधिकारी नियुक्त भी नहीं किया था कि उनकी मृत्यु हो गई। इसलिए सवाल खड़ा हुआ कि तेजी से फैलते धर्म का नेतृत्व कौन कर सकता है।
कुछ लोगों का मामना था कि नेता आम राय से चुना जाए जबकि कुछ चाहते थे कि पैगंबर के किसी वंशज को ही खलीफा बनाया जाए। खलीफा का पद पैगंबर मोहम्मद के ससुर और विश्वासपात्र रहे अबु बकर को मिला जबकि कुछ लोग उनके चचेरे भाई और दामाद अली को नेतृत्व सौंपने के हक में थे।
अबु बकर और उनके दो उत्तराधिकारियों की मौत के बाद अली को खलीफा बनाया गया था, लेकिन तब तक दोनों धड़ों में मतभेद बहुत गहरा चुके थे। लेकिन फिर कुफा की मस्जिद में अली को जहर से बुझी तलवार से कत्ल कर दिया गया, अब मौजूदा समय में यह जगह इराक में है।





