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जिंदगी और मौत से लड़ते चम्पावत के नौनिहाल, जान को जोखिम में डालकर स्कूल जाने को है मजबूर!

 चम्पावत – सरकार आई और गई पर विकास के नाम पर आज भी उत्तराखंड का पवर्तीय क्षेत्र पिछड़ा ही नज़र आ रहा है। राज्य बनने से पूर्व जब उत्तराखंड यूपी का हिस्सा हुआ करता था तब यहां के  लोगों की यह कल्पना नही थी कि राज्य बनने के बाद मैदानी इलाकों   के साथ साथ  पहाड़ी जनपदों  में विकास  होगा  ।

चुनाव से पूर्व राजनैतिक दल विकास के कई दावे करते  हैं, पर सत्तासीन होने के बाद विकास सिर्फ कागजों और भाषणों तक ही सिमट कर रह जाता है। विकास के दावे की एक और पोल खोलती हुई  तश्वीर देखिए यह वह तश्वीर है जहां के लोग आज़ादी के बाद से एक पुल की मांग कर रहे हैं । लेकिन पुल तो उन्हें नही मिला  पर  उनकी उम्मीदें  अभी भी कायम हैं। दुर्गम क्षेत्र में बच्चों को पढ़ने के लिए अभी  भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। राज्य बनने के 17 साल बाद भी कई स्कूलों में बच्चे  अभी  भी सड़क और पुल न होने के कारण जंगल ,नदी ,नालो को पार कर स्कूल पहुँचते  हैं।

जिला चम्पावत के राजकीय इंटर कॉलेज में पाली में 250 बच्चे पढ़ते है जिनमें  बड़ौली,पंडगा,न्यूडी, रियूडी,रीठा,लफड़ा,दियुरी और टाक के बच्चे हर रोज अपनी जान को जोख़िम में डालकर क्वरैला नदी को पार करते हैं । हालही में नदी पार करते वक्त अभी तक  दो बच्चे  अपनी जान गवा बैठे हैं । अक्सर यहां  पर स्कूल जाने के लिए बच्चे आपको जिंदगी दांव पर लगाते हुए दिखाई दे जाएंगे । यही नहीं  छोटे बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वाले माता-पिता भी उन्हें गोद मे उठाकर नदी पार कराते हुए भी दिखाई देंगे। बरसातों के वक्त इस नदी को पार करना काफ़ी मुश्किल हो जाता है। ऐसा नहीं  है कि इनकी इस जद्दोजहद की जानकारी नेताओं को नहीं  है आजादी के बाद से पुल की मांग चली आ रही है।  स्थानीय लोग इस बाबत को कई बार सरकार और क्षेत्रीय विधायक को अवगत करा चुके है लेकिन नतीजा सिफ़र ही रहा ।

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