Homeराज्यउत्तराखण्डखोजती रही पुलिस,नहीं मिले भिखारी!

खोजती रही पुलिस,नहीं मिले भिखारी!

बड़ी खबर: देश का कोई भी शहर हो किसी न किसी चैराहे व ट्रेफिक सिग्नल पर गाड़ी रुकते ही भिखारी घेर लेते हैं,लेकिन इन दिनों देहरादून शहर में भिखारियों को खोज पुलिस को भिखारी नहीं मिल पा रहे हैं। राजधानी देहरादून में बुधवार को पुलिस की ओर से चलाए गए के दौरान शहर में एक भी भिखारी नहीं मिला। इन भिखारियों को ढूंढने निकली टीम पूरे दिन शहर में भटकती रही, लेकिन नतीजा सिफर रहा। यु तो दून शहर के चैराहों व प्रमुख बाजारों में भिखारियों का जमावड़ा लगा रहता था। इन भिखारियों में बुजुर्ग पुरुष-महिलाओं से छोटे बच्चे तक शामिल होते थे, जो चैराहों पर गाड़ियों के खड़े होते ही उनका शीशा खटखटाने लगते थे।लेकिन अब शासन की सख्ती के बाद भीख मांगने को अपराध की श्रेणी में डाला गया है और पुलिस को शहर में लगातार गंभीर होती इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए शासन ने भिक्षावृत्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत पुलिस ने 25 जुलाई को चलाकर17 भिखारियों को पकड़ा और उनके खिलाफ भिक्षु अधिनियम के तहत कार्यवाही की है  पुलिस ने आइएसबीटी से लेकर बल्लूपुर चैक तक कई टीमों को भिखारियों की तलाश के लिए लगाया गया था। कार्रवाई के दौरान चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के लोगों को भी साथ लिया गया था, ताकि भीख मांगने वाले बच्चों को बाल सुधार गृह भेजा जा सके।

 
 भिखारी उठाते गलत फायदा
 
पुलिस की माने तो भिखारी आम आदमी की दरियादिली का गलत फायदा उठाते हैं. देहरादून में एक आंकडे के मुताबिक 6 हजार से ज्यादा भिखारी हैं जिनमें तकरीबन आधे से ज्यादा दिव्यांग हैं. एसएसपी देहरादून निवेदिता कुकरेती कुमार ने बताया कि राजधानी में भिखारियों की बडी तादात है. भिखारियों की आड में कुछ आपराधिक प्रवृति के लोग भी गलत काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि भिखारियों के वेरिफिकेशन के लिए पुलिस विशेष अभियान भी चला रही है, ताकि सुरक्षा के दृष्टिगत कोई दिक्कत न हो.

भीख मांगने पर है पाबंदी

राज्यपाल की ओर से जारी अधिसूचना में उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम, 1975 (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2002) की धारा-एक की उपधारा-तीन में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जुलाई-2017 से पूरे उत्तराखंड में भिक्षावृत्ति पर पाबंदी लगा दी गई है. भिक्षावृत्ति पर पाबंदी लगने के बाद राज्य सरकार भीख मांगने वालों के पुनर्वास की व्यवस्था भी कराएगी. इसके लिए समाज कल्याण निदेशालय जल्द ही सभी जिलों में भिक्षुक गृहों का संचालन करने की तैयारी में है, ताकि भिक्षुकों को स्वरोजगार की ट्रेनिंग देकर उनके पुनर्वास का इंतजाम किया जाए.

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