Homeब्रेकिंग न्यूज़सोशल मीडिया पर छाया पीएम का नाम #पलटीमार_मोदी_ जाने क्यों!!

सोशल मीडिया पर छाया पीएम का नाम #पलटीमार_मोदी_ जाने क्यों!!

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नोटबैन के बाद से बैकों में रूपये जमा करने वालों की फजीहत कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। सरकार के इस नए नियम ने जहां लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया है वहीं सोशल मीडिया पर भी सरकार की खूब खिल्ली उड़ रही है। दरअसल, बीते कल नोटिफिकेशन आया कि पांच हजार या उससे ऊपर एक बार ही जमा किया जा सकता है. बारबार जमा करने पर सवाल पूछे जाएंगे.

नोटबंदी को लेकर सरकार की तरफ से बारबार नियम बदलने को लेकर सोशल मीडिया पर लोग सरकार को आड़े हाथों ले रहे हैं. इसके लिए ट्विटर पर #पलटीमार_मोदी_सरकार का हैशटैग भी चला रहे हैं. जिसपर लोग सरकार के फैसलों का मजाक भी उड़ा रहे हैं और विरोध भी कर रहे हैं.

सरकार के फैसलों का मजाक 

स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव ने फेसबुक पर बैंक फॉर्म में अपनी प्रतिक्रिया को शेयर किया है. उन्होंने लिखा कि  8 नवंबर 2016 से आज तक मैंनें कोई कैश अपने अकाउंट में जमा नहीं करवाया है. मुझे कोई कारण समझ में नहीं आता कि मैं इसके [बैंक में देरी से डिपोज़िट करवाने] लिए विशेष स्पष्टीकरण क्यों दूं. आमतौर पर मैं क़तार ख़त्म होने का इंतज़ार करना पसंद करता हूं. प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री और आरबीआई ने मुझे आश्वासन दिया था कि बैंकों की ओर भागने की ज़रूरत नहीं है, डिपॉजिट के लिए मेरे पास 30 दिसंबर तक का समय रहेगा. मैंनें उनका भरोसा किया. योगेंद्र यादव ने कहा कि मेरी चिंता इस बात से नहीं है कि ऐसे फ़रमान की वजह से मेरे जैसे कई लोगों को थोड़ी असुविधा हुई. यह तो छोटी बात है. असल सवाल है वित्तीय और बैंकिंग संस्थाओं की वैधता और विश्वसनीयता का. सरकार आज एक वादा करती है, कल उसे वापस ले लेती है। हमें याद रखना चाहिए कि करेंसी काग़ज़ का एक टुकड़ा मात्र है और इसलिए चलता है क्योंकि लोग उसमें विश्वास करते हैं। जिस दिन यह विश्वास ख़त्म हो जाएगा, करेंसी का कोई मूल्य नहीं होगा, दुर्भाग्य की बात है कि हमारी सरकार इस बात को नहीं समझ पा रही है.

नोट जमा करवाने आए एक छोटे दुकानदार ने लिखा कि प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री जी ने मना किया था कि जल्दबाजी की जरूरत नहीं है. यह जवाब देखकर बैंककर्मी भी सख्ते में आ गए.

दिहाड़ी मजदूर ने लिखा कि मुझे नहीं पता… सरकार से पूछो… कभी कुछ कहते हैं कभी कुछ कहते हैं. सुबह से लाइन में लगे हैं. काम पर भी जाना है.

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने लिखा है, ”जी-जी … यही तो नई राजनीति का आग़ाज़ है! (एक गुज़र चुका होर्डिंग).”

लगातार बदल रहे नियमों पर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी कटाक्ष किया है : “आज का मौसम बताने की बाद अब पेश है आज का आरबीआई का नया नियम”

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