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गलत मूल्यांकन छात्रों के भविष्य से कर रहा खिलवाड़, सूचना आयुक्त ने श्रीदेव सुमन विवि के कुलसचिव को किया तलब।

देहरादून – सवाल का जवाब ठीक हो या गलत, श्रीदेव सुमन विवि ने सबको सही मानते हुए नंबर बांट दिए। मूल्यांकन की ये गड़बड़ी सूचना आयोग में आए एक मामले से सामने आई। राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने इस पर चिंता जताते हुए विवि के कुलसचिव को व्यक्तिगत तलब किया है तो वहीं विवि के लोक सूचना अधिकारियों पर दस हजार का जुर्माना लगा दिया है।

श्रीदेव सुमन विवि के छात्र की कॉपी सूचना आयुक्त के सामने आई तो वे हैरान रह गए। इसमें सवाल था कि मुस्लिम लीग के संस्थापक कौन थे, जिसका जवाब मोहम्मद अली जिन्ना लिखा गया था। इस गलत जवाब पर भी परीक्षक ने अंक दिए थे।

राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने सूचना अधिकार के तहत एक शिकायतकर्ता की इतिहास एवं राजनीति शास्त्र की उत्तर पुस्तिकाएं आयोग में तलब कर अपीलार्थी को उनकी प्रति उपलब्ध कराई। जांची गई उत्तर पुस्तिकाएं समय पर उपलब्ध न कराने पर लोक सूचना अधिकारी एवं डीम्ड लोक सूचना अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए परीक्षा नियंत्रक को मूल्यांकन पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने उत्तर पुस्तिकाओं के गैर जिम्मेदाराना मूल्यांकन तथा सूचना अधिकार के अंतर्गत अनुरोध पत्रों का जिम्मेदारीपूर्वक निस्तारण न किए जाने पर विवि को क्षतिपूर्ति का नोटिस जारी करते हुए कुलसचिव को विवि की ओर से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। विवि से संबंधित सूचना अधिकार के एक अन्य प्रकरण में समय पर सूचना उपलब्ध न कराने पर आयोग ने लोक सूचना अधिकारी तथा डीम्ड लोक सूचना अधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

गलत मूल्यांकन छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

अपने अंतरिम आदेश में आयोग ने कहा कि प्रश्नगत उत्तर पुस्तिका के अवलोकन से विदित होता है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही नहीं किया गया है। प्रेषित सूचना के परीक्षण में यह तथ्य प्रकाश में आया कि उत्तर पुस्तिका में कई प्रश्नों को परीक्षक की ओर से जांचा ही नहीं गया। प्रेषित सूचना का मूल उत्तर पुस्तिका से मिलान किये जाने पर गैर जिम्मेदाराना मूल्यांकन की पुष्टि होती है। सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने कहा कि परीक्षक की ओर से सही मूल्यांकन न किया जाना उत्तर पुस्तिका में लिखे प्रश्नों के उत्तरों की जांच न किया जाना, गलत अंक दिया जाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लापरवाही या जानबूझकर की गई गड़बड़ी किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं हो सकती। एक ओर जब मूल्यांकन की पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत पर बल दिया जा रहा है, वहीं राज्य के विवि में मूल्यांकन की गैर जिम्मेदाराना व्यवस्था विवि की कार्य संस्कृति एवं विश्वसनीयता पर सवाल खडे़ करती है। आयोग ने शिकायतकर्ता के क्षतिपूर्ति दिलाने के अनुरोध पर कुलपति से आगामी सुनवाई में ये स्पष्टीकरण की अपेक्षा की है कि क्यों न विवि पर क्षतिपूर्ति अधिरोपित की जाए।

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