देहरादून – मूल निवास और भू कानून को लेकर एक बार फिर रार शुरू हो गई हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री और किच्छा विधानसभा से कांग्रेस के विधायक तिलक राज बेहड़ ने इसका कड़ा विरोध जताया है। तिलक राज बेहड़ ने कहा है कि राज्य गठन के दौरान जो राज्य पुनर्गठन विधेयक पास हुआ था उसमें साफ है कि उत्तर प्रदेश के कानून ही लागू रहेंगे, मूल निवास को लेकर उन्होंने कहा कि तराई के क्षेत्र में मूल निवास नहीं बनता है वहां स्थाई निवास प्रमाण पत्र की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यदि इस कानून को विधानसभा में लाया जाता है तो इसका पूरा विरोध किया जाएगा। और इसे किसी भी सूरत में बने नहीं दिया जाएगा।

इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता व भाजपा नेता रविंद्र जुगरान ने कटाक्ष किया है। रविंद्र जुगरान ने कहा है कि, यदि मूल निवास और सख्त भू कानून राज्य में लागू होता है तो यह पहाड़ के लिए ही नहीं बल्कि तराई के क्षेत्र को भी संरक्षित करता है। मूल निवास को लेकर उन्होंने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने भारत पाक विभाजन के दौरान जब शरणार्थी तराई के क्षेत्र में बसे तो यह 1950 से 55 के पहले का मामला है तो वह भी मूल निवास का अंग है। इन विधायकों को पढ़ने की आवश्यकता है।
बता दे की मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति लगातार इन दोनों मांगों को लेकर सड़कों पर है समिति द्वारा जहां दो बड़ी रैलियां की जा चुकी है तो वही हल्द्वानी में तीसरी बड़ी रैली जल्द करने जा रही है।



