
देहरादून। पर्यावरणविद और ग्लेशियरों को बचाने के लिए सरकार को संरक्षण देना होगा। यह विचार प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान हिमालय ग्लेशियर व हिमनद बचाओ की संयोजिका शांति ठाकुर व्यक्त किए। श्रीमती ठाकुर का कहना है कि वह पिछले 18-19 वर्षों से गंगोत्री ग्लेशियर, हिमालय व हिम नदियों के संरक्षण हेतु प्रयासरत है। कई बार उन्होंने सरकार से अपील भी की लेकिन उसका कोई असर नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि गंगोत्री ग्लेशियर समेत हिमालय पर हो रही मानवीय गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाए। श्रीमती ठाकुर का कहना है कि छह माह बर्फ से ढके रहने वाले हिमालय अब बर्फविहीन हो रहे हैं। उन्होंने केदारधाम को स्मार्ट सिटी बनाने की व्यवस्था का भी विरोध किया तथा कहा कि इससे मानवीय गतिविधियां और बढ़ेगी जो हिमालयी व्यवस्थाओं के लिए अहितकारी होंगी।
शांति ठाकुर यह मानती है कि 13 जून ग्लेशियर संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाए और हिमालय में मानवीय गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाए। उनका कहना है कि पूरी तरह मानवीय गतिविधियों पर रोक संभव नहीं है लेकिन अंकुश लगाकर हिमालय को संरक्षित रखा जा सकता है। अगर हिमालय नहीं रहेगा तो नदियां नहीं रहेंगी तो जीवन नहीं रहेगा। यह मानवता के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा। श्रीमती ठाकुर ने सरकार से मांग की है वह हिमालय, हिमनदों और ग्लेशियरों का संरक्षण करें।
हिमालय व ग्लेशियरों को संरक्षण देना जरूरी : शांति ठाकुर
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