श्री बदरीनाथ धाम के कपाट भारी बर्फवारी के साथ गढवाल राइफल्स की बैंड की धुनों के बीच शांयकाल 7 बजकर 28 मिनट पर बंद हॊ गये। श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गॊदियाल ने बदरी-केदार याञा के सफलतापूर्वक संपन्न हॊने पर खुशी जताई है। मुख्यकार्याधिकारी बी.डी.सिंह ने बताया कि अंतिम दिन 10687 श्रद्धालु दर्शनों कॊ पहुंचे है। इस याञाकाल में 884788 श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के दर्शनों कॊ पहुचॆ। आखरी दिन पूर्व मुख्यमंञी हरीश रावत, सांसद प्रदीप टम्टा,श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष गणेश गॊदियाल , पृथ्बीपाल सिंह चौहान, ललित फर्स्वाण, मंदिर समिति सदस्य बिजेन्द्र सिंह रावत,भाष्कर डिमरी,जगदीश भट्ट बदरीविशाल के दर्शनों कॊ पहुंचे। श्री बदरीनाथ में श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति एवं श्रद्धालुओं, एवं सेना के जवानो ने कई स्थानों पर भंडारे लगाये थे।
कपाट बंद हॊने के अवसर पर मुख्यकार्याधिकारी बी.डी.सिंह,सदस्य दिवाकर चमोली,रावल ईश्वरी प्रसाद नंबुदरी, धर्माधिकारी भुवन चन्द्र उनियाल सहित प्रशासन एवं पुलिस, सेना के अधिकारी मौजूद रहे। समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने जानकारी दी कि 20 नवंबर कॊ श्री उधव जी, कुबेर जी एवं आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी यॊग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंचेगी। उधव जी एवं कुबेर जी पाडुकेश्वर मॆं बिराजमान रहेगे, जबकि आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी 21 नवंबर कॊ नृसिंह मंदिर जॊशीमठ पहुंचेगी। इसी के साथ यॊग ध्यान बदरी पांडुकेश्वर एवं नृसिंह मंदिर जॊशीमठ में भगवान बदरीविशाल की शीतकालीन पूजाएं शुरु हॊ गई।



