गुजरात ; जंहा गुजरात में विधानसभा चुनाव सर पर हैं वहीं सत्ताधारी बीजेपी की नींद गुजरात में चल रहे एक सोशल मीडिया कैंपन विकास गांडो थायो छे, जिसका मतलब हिन्दी में है विकास पागल हो गया है ने उड़ा कर रख दी है। बताते चलें कि पिछले दो हफ्ते से इस सोशल मीडिया कैपेन से परेशान बीजेपी को सफाई देनी पड़ी है और इस तर्ज पर चुटकुले भी बनाए जा रहे हैं।
विकास को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। बता दें कि गुजरात में 9 लड़कियों ने तो केवल इसलिए सगाई तोड़ दी, क्योंकि उनका नाम विकास था। पेट्रोल की कीमत 80 रुपये हो गई है, क्योंकि विकास पागल हो गया है। विकास दर घट गई है, पर देश विकास कर रहा है, क्योंकि विकास पगला गया है।
सोशल मीडिया पर विकास गांडो थायो छे वाले हैशटैग के चुटकुले यू-ट्यूब वीडियो से अटे पड़े है। अब तो इस पर एप्लीकेशन और गेम की सीरीज भी सामने आ रही हैं। गुजरात में इन दिनों हर व्यक्ति की जुबान पर यही चढ़ा है। सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में समस्याओं को विकास गांडो थायो छे के साथ जोड़कर मजे ले रहा है।
विकास गांडो थायो छे!
विकास गांडो थायो छे गुजराती में लिखे इस वाक्य का हिन्दी अनुवाद है, विकास पागल हो गया है। इसकी शुरुआत तब हुई, जब सागर सवालिया नाम के एक 20 साल के पाटीदार युवक ने गुजरात परिवहन की एक टूटी पहिये वाली बस पर लिखी लाइनों को फेसबुक पर पोस्ट किया। इसमें लिखा था परिवहन निगम की बस हमारी है, पर जब आप सफर करते हैं, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है, सफर करते रहिए, विकास पागल हो गया है।
इस हैशटैग पर पाटीदारों के पोस्ट जैसे ही बढ़ने लगे, कांग्रेस और हार्दिक पटेल के संगठन ने इस कैपेन को हवा दी। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ने की रणनीति के खिलाफ इसे सोशल मीडिया कैंपेन बना लिया. गुजरात प्रदेश कांग्रेस और हार्दिक पटेल के पाटीदार समाज की डिजिटल आर्मी ने गुजरात सरकार और मोदी सरकार के विकास के दावों का मजाक उड़ाते हुए हजारों पोस्ट डाले।
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी और हार्दिक पटेल चुनावी कार्यक्रमों में जमकर विकास पागल हो गया है, पर चुटकी लेकर बीजेपी को बैकफुट पर खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या अमित शाह गुजरात चुनाव में सोशल मीडिया से डरने लगे हैं?
अब तक हर चुनाव में सोशल मीडिया के जरिये एजेंडा चलाने वाली बीजेपी गुजरात में विकास गांडो छे के सामने कोई वैकल्पिक हैशटैग कायम नहीं कर पा रही और बीजेपी की डिजिटल आर्मी इस हैशटैग को ट्रेंड करने से रोक नहीं पा रही है। अब तक सोशल मीडिया पर एकाधिकार बनाए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को अहमदाबाद में युवाओं के टाउनहॉल कार्यक्रम में कहना पड़ा- बीजेपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों पर युवा ध्यान न दें। वे खुद अपनी समझ का इस्तेमाल करें और परखें कि गुजरात में बीजेपी के आने से पहले और उसके बाद कितना विकास हुआ है।
हद तो तब हो गई, जब सोमवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह माया कोडनानी मामले में गवाही देने गुजरात पहुंचे, तो कई हफ्ते ट्रेंड करने के बाद फिर से सोमवार को पूरे दिन वही नारा ट्वटिर पर ट्रेंड करता रहा।

गुजरात है जरूरी!
2014 में मिले विशाल जनादेश और यूपी विधानसभा चुनाव के प्रचंड जीत में सोशल मीडिया का बड़ा योगदान रहा है। चुनावी माहौल बनाने में सोशल मीडिया की ताकत को बीजेपी आजमा चुकी है। जमीन पर मजबूत होने के बाद भी बीजेपी गुजरात में रिस्क नहीं ले सकती, क्योंकि गुजरात प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का गृहराज्य है. यहां कमजोर होने का संदेश भी बड़ा है और नतीजा भी।
साभार -द क्विंट