Monday, February 23, 2026
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वास्तु : कभी न करें भगवान की इन मूर्तियों के दर्शन, वरना आप सकते हैं परेशानी में, बढ़ जाएगी और मुश्किलें…! जानने के लिए पढ़ें और शेयर कीजिए

भगवान् की पूजा हर घर में की जाती है, लोग अपने घर में भगवान को एक खास जगह देते है और उसी जगह पर रोज़ाना उनकी पूजा पाठ की जाती है,एक तरह से माना जाये तो ये स्थान हमारे घर में एक मंदिर के रूप में रहता है। मंदिर चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन उसका वास्तु के अनुसार ही होना शुभ माना जाता है। घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियां रखकर पूजा अर्चना करने की परंपरा सदियों पुरानी है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ ऐसे देवी-देवताओं की मूर्तयिां भी हैं जिन्हें घर के मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इनके घर में होने पर सुख समृद्धि घर से चली जाती है।
यदि आपके घर का पूजाघर गलत दिशा में बना हुआ हैं तो पूजा का फल प्राप्त नहीं होता हैं फिर भी ऐसे पूजाघर में उत्तर अथवा पूर्वोत्तर दिशा में भगवान की मूर्तियॉ या चित्र आदि रखने चाहिए । पूजाघर की देहरी को कुछ ऊँचा बनाना चाहिए। पूजाघर में प्रात:काल सूर्य का प्रकाश आने की व्यवस्था बनानी चाहिए ।
पूजाघर में वायु के प्रवाह को संतुलित बनाने के लिए कोई खिड़की अथवा रोशनदान भी होनी चाहिए । पूजाघर के द्वार पर मांगलिक चिन्ह, (स्वास्तीक, ऊँ,) आदि स्थापित करने चाहिए । ब्रह्मा, विष्णु, महेश या सूर्य की मूर्तियों का मुख पूर्व या पश्चिम में होना चाहिए । गणपति एवं दुर्गा की मूर्तियों का मुख दक्षिण में होना उत्तम होता हैं । काली मॉ की मूर्ति का मुख दक्षिण में होना शुभ माना गया हैं । हनुमान जी की मूर्ति का मुख दक्षिण पश्चिम में होना शुभ फलदायक हैं। पूजा घर में श्रीयंत्र, गणेश यंत्र या कुबेर यंत्र रखना शुभ हैं ।
कई मूर्तियां ऐसी भी होती हैं, जिनका दर्शन करना अशुभ होता है। भगवान के ऐसे ही कुछ स्वरूप और मूर्तियों के बारे में आपको पता होना चाहिए। वास्तु ग्रंथों में भगवान की मूर्तियों की दिशा और स्थान को लेकर कुछ खास बातें बताई गई हैं। इन बातों का ध्यान नहीं रखने से उनका अशुभ फल मिलने लगता है और वास्तु दोष भी बढ़ने लगते हैं। इन वास्तु ग्रंथों में बताया है कि भगवान की मूर्तियों की पीठ, उनकी संख्या और मूर्तियों के आकार-प्रकार को लेकर सावधान रहना चाहिए।

इन बातों का रखें खास ध्यान


1. भगवान की मूर्ति घर में इस तरह रखनी चाहिए कि इनके पीछे का भाग यानि पीठ दिखाई नहीं दे। भगवान की पीठ का दिखना शुभ नहीं माना जाता।
2. पूजा स्थल में एक ही भगवान की दो मूर्तियां रखना भी अच्छा नहीं होता है। खासतौर पर अगर दोनों मूर्तियां आस-पास या आमने-सामने हो। ऐसी मूर्तियों के दर्शन करने से बार-बार लड़ाई होती है।
3. भले ही किसी मूर्ति से कितनी ही गहरी आस्था जुडी हो, लेकिन मूर्ति खंडित हो जाए तो उसके दर्शन करना अच्छा नहीं होता है। ऐसी मूर्ति के दर्शन या पूजा करना अशुभ फलों का कारण बनता है।
4. मंदिर में भगवान की ऐसी मूर्ति रखनी चाहिए, जिसमें उनका मुंह सौम्य और हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में हो। रौद्र और उदास मूर्ति के दर्शन करने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
5. भगवान की ऐसी किसी मूर्ति के दर्शन नहीं करने चाहिए, जिसमे वे युद्ध करते या किसी का विनाश करते नज़र आए। ऐसी मूर्ति के दर्शन करना भी दु:खों का कारण बन सकता है।
6. घर के मंदिर में मूर्तियों की उंचाई हाथ के अंगूठे जितनी होनी चाहिए। इससे ज्यादा उंची मूर्तियां ठीक नहीं मानी गई हैं।

 

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