लोकसभा चुनाव 2019: उत्तराखंड में पांचों सीट जीतने के लिए भाजपा ने कसी कमर, लेकिन कम नहीं है चुनौतियां……..

देहरादून– लोकसभा चुनाव का डंका बजते ही उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा ने कमर कस ली है। पार्टी के सामने प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर में पार्टी ने पांचों सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। इस बार भी भाजपा को मोदी के चेहरे का ही भरोसा है। वह पुलवामा आतंकी हमले और एयर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पूरे प्रदेश में चली राष्ट्रवाद की लहर पर सवार हो चुकी है। प्रदेश में पांच में से चार सीटों पर उसका कांग्रेस से सीधा मुकाबला है। लेकिन हरिद्वार संसदीय सीट पर कांग्रेस के अलावा बसपा और सपा का गठबंधन चुनावी समीकरणों को फंसाने की क्षमता रखता है। वहीं, पांचों सीटों पर पार्टी किन चेहरों पर दांव लगाएगी, अभी इस पर पार्टी ने सस्पेंस बरकरार रखा है। हालांकि संगठन के भीतर सेटिंग-गेटिंग की चर्चा भी खूब हो रही है। सूत्रों के अनुसार पौड़ी संसदीय सीट पर मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के उम्रदराज होने के बावजूद पार्टी उन्हें वहां से चुनाव लड़ाना चाहती है। पार्टी में ये चर्चा भी जोरों पर है कि बदली हुई परिस्थितियों में पार्टी बाकी चारों सीटों पर मौजूदा सांसदों को ही चुनाव लड़ा सकती है। संगठन में हरिद्वार में डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक, अल्मोड़ा में अजय टम्टा, नैनीताल में भगत सिंह कोश्यारी और टिहरी में मालाराज्य लक्ष्मी को मैदान में उतारने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।

भाजपा के सामने चुनौती भी कम नहीं

उत्तराखंड मे मजबूत सांगठनिक नेटवर्क पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। उसके पास पांचों सीटों पर प्रत्याशी के मजबूत और जाने पहचाने चेहरे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से एक बार सीधा संवाद कर चुके हैं। चुनाव में आरएसएस का मजबूत समर्थन भी है लेकिंन फिर भी भाजपा के सामने कांग्रेस ही सबसे बड़ी चुनौती है। बेशक सैन्य बहुल प्रदेश में वह पूरा चुनाव राष्ट्रवाद के मुद्दे पर केंद्रित करने का प्रयास करेगी, लेकिन उसे केंद्र और प्रदेश सरकार के सत्तारोधी रुझान का सामना भी करना है। लोकसभा में सूपड़ा साफ होने और विधानसभा में 11 विधायकों की संख्या पर सिमट जाने के बावजूद कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक कम नहीं हुआ है। ऐसे मे यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इम्तिहान की कसौटियों पर खरा उतर पाती है या नहीं?

 

 

 

 

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