इंसाफ के 23 साल बीत जाने के बाद भी आज रामपुर तिराहा कांड में इंसाफ के लिए उत्तराखंड के लोग टकटकी लागाये बैठे हुए है। हर वर्ष 2 अक्टूबर को पूरे देश मे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई जाती है। लेकिन वही उत्तराखंड के लिए आज का दिन एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। आज से 23 साल पहले आज ही के दिन रामपुर तिराहे पर 1994 में ऐसा विभत्स कांड हुआ था जिसने पहाड़वासियों की रूह कंपा दी थी। राज्य बनने के 17 साल बाद भी शहीदों के हत्यारों को सजा नही मिल पाई है । लेकिन यह जरूर है कि राज्य बनने के बाद सत्ता की मलाई खाने वाले नेतागण हर वर्ष शाहिद स्थल पहुँचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर याद करते है। लेकिन इंसाफ़ की लड़ाई में उनका सहयोग नज़र नही आता।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
वंही आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुजफरनगर रामपुर तिराहा स्थित उत्तराखंडआंदोलनकारी शहीद स्मारक जाकर राज्य निर्माण आंदोलन में बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा है कि सरकार शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के प्रतिबद्ध है।
वंही रामपुर तिराहा कांड के 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक एक भी आरोपी को सज़ा नही हुई है। राज्य आन्दोलनकारियो का कहना है कि सरकारों की प्राथमिकता में यह मुद्दा ही नही रह गया है। राज्य आन्दोलनकारी रविन्द्र जुगरान का कहना है कि शहीदों के हत्यारों को सजा नही मिली है यह हमारे सिस्टम के लिए शर्मनाक है। अब तक तमाम गवाहों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। यह बेहद शर्मनाक है कि यहां की सरकारों ने आरोपियों को बचाने का ही काम किया है। सरकार को इस पर स्वेत पत्र जारी करना चाहिए ताकि पता तो चले सरकारो ने अब तक रामपुर प्रकरण पर किया क्या है।
वही राज्य आंदोनकारी विजय लक्ष्मी गुसाई का कहना है कि पहले महिलाओ की आवाज़ को सुना जाता था लेकिन अब महिलाओ की आवाज़ को दबाया जा रहा है।
बाईट-विजय लक्ष्मी गुसाई राज्य आंदोलनकारी
इन मामलों में सुनवाई होनी है
1-रामपुर तिराहे पर हुए रेप के मामले में सीबीआई बनाम मिलाप सिंह मामले में आरोप तय किये जा चुके है। फ़िलहाल इस मामले में गवाही चल रही है
2- दूसरे मामले में सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी में हाईकोर्ट से स्टे चल रहा है।
3-सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर सिंह। कांधला के तत्कालीन थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह पर आरोप है कि उत्तराखंड आन्दोलनकारियो पर पुलिस पर फायरिंग के बाद उन्होंने उत्तराखंडियों की तलाशी में फर्जी तौर पर हथियार बरामदगी दिखाई और मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में आरोप तय हो चुका है और सुनवाई चल रही है। ब्रजकिशोर कई बरस पहले सेवानिवृत्त हो गए है।
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