यशवंत सिन्हा ने कहा भाजपा को अलविदा, प्रधानमंत्री की नीतियों की आलोचना

देहरादून।  देश के वरिष्ठ नेताओं में से एक यशवंत सिन्हा ने भाजपा को अलविदा कह दिया है। सरकार बनने के बाद से ही यशवंत सिन्हा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के साथ पार्टी से लगातार नाराज चल रहे थे और गाहे-बगाहे पार्टी पर आरोप लगाने में कोई कोताही नहीं बरत रहे थे। यशवंत सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की कार्यशैली से अपनी नाराजगी कई बार प्रकट कर चुके थे। हाल ही में उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं के साथ विधिवत बैठक कर विरोधियों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया जो सफल नहीं रहा। कभी अपने बयान तो कभी ट्विटर के माध्यम से अपनी बात कहने वाले यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री पर लगातार आक्रमण किया। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने उनके बयानों का ज्यादा प्रतिकार नहीं किया। मजबूरन उन्हें पार्टी छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा। 21 अप्रैल शनिवार को यशवंत सिन्हा ने भाजपा से अपने को अलग कर लिया और पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। अब जब श्री सिन्हा पार्टी छोड़ चुके हैं, ऐसे में भाजपा उन्हें दागदार दिखती है।
अब यशवंत सिन्हा को लगता है कि देश में लोकतंत्र पर खतरा मंडराने की स्थिति नजर आ रही है। हमें इस स्थिति पर मिलकर विचार-विमर्श करना है। आपको बता दें कि यशवंत सिन्हा देश के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। शनिवार को सिन्हा बिहार की राजधानी पटना में थे। उन्होंने दोपहर में यहीं एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। बोले, “मैं बीजेपी संग अपने संबंधों को खत्म कर रहा हूं। आज से मैं किसी प्रकार की दलगत राजनीति से संन्यास ले रहा हूं।” पूर्व केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, “मैंने चुनावी राजनीति पहले ही छोड़ दी थी। अब मैं दलगत राजनीति छोड़ रहा हूं। लेकिन मेरा दिल देश के लिए धड़कता है।”

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