मुस्लिम जनसंख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी, खतरे का संकेत

देहरादून।  टिहरी जिले के घनसाली इलाके में 18 वर्षीय मुस्लिम युवक हिंदू समुदाय की 16 वर्षीय युवती के साथ एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए। इसकी सूचना स्थानीय लोगों को मिली। गुस्साई भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की। घनसाली बाजार में हिंदू समुदाय के लोगों ने 15-16 दुकानों पर तोड़फोड़ करके उसे खंडहर में तब्दील कर दी। इसी बीच पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उग्र भीड़ को शांत करने का प्रयास किया। पुलिस के द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ पर काबू पाया गया। इसके साथ ही पुलिस के द्वारा युवक और युवती को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दूसरे समुदाय के लोगों के द्वारा महिलाओं और युवतियों को प्रेम जाल में फंसाया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने मांग करते हुए कहा कि दूसरे समुदाय के लोगों को देश से भगा देना चाहिए। यह मामला अकेले घनसाली का नहीं है अब तक उत्तराखंड में दर्जनों घटनाएं इसी वर्ष घटी है।

इसी प्रकार देहरादून के बंजारावाला क्षेत्र में हिन्दू बहुल क्षेत्र में एक मदरसे के नाम पर मस्जिद बनाने का प्रयास हुआ, जिसका क्षेत्रवासियों ने जमकर विरोध किया। जबकि तत्कालीन विधायक दिनेश अग्रवाल और उनके सहयोगी इस मस्जिद को बनाने के हिमायती थे। जबकि कांग्रेस नेता एवं पूर्व प्रधान संत राम पासी (अब स्वर्गीय) इस मस्जिद के पक्ष में नहीं थे और मस्जिद रुक गई। ठीक इसी प्रकार विवेकानंद नगर बंजारावाला के समीप आधा दर्जन बंगाली अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का राशन कार्ड एलआईयू केसदस्यों ने आर्थिक लाभ लेकर बनवा दिया। आज वे उत्तराखंड के नागरिक है। यह स्थिति केवल देहरादून की नहीं है, पूरे उत्तराखंड की है। उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी हुई है, वह भी 20 से25 गुना अधिक। कहीं-कहीं यह संख्या 50 से भी अधिक है, जिसके कारण लव जेहाद जैसी घटनाएं बढ़ी है। अगस्तमुनि में अगस्त माह में एक अल्पसंख्यक समुदाय के युवा द्वारा यह बालिका के साथ अनाचार करने का प्रयास हुआ और क्षेत्र में आगजनी जैसी जमकर घटनाएं हुई। आज भी वह क्षेत्र अशांत है। यह स्थिति तब है जब सूबे में भाजपा की सरकार है।
2001 में उत्तराखंड बनने के समय मुस्लिम आबादी केवल 11.9 प्रतिशत थी जो 2011 के आंकड़ों में लगभग 14 प्रशित हो गई है। तीर्थ नगरी हरिद्वार में मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है यहां 33.16 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की बढ़ कर 4 लाख 78 हज़ार से ज्यादा हो गई है,2011 से 2018 में ये आबादी और भी ज्यादा हो गई है। इनमें से अधिकांश लोग बांग्लादेश, बंगाल, बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर,मुज्जफरनगर, नजीबाबाद, बिजनौर ,मेरठ जिलों से घिरे हरिद्वार आदि क्षेत्रों से आए है। देहरादून जनपद में मुंस्लिम वोट बैंक धर्मपुर, सहसपुर, राजपुर आदि सीटों पर काफी प्रभावित करने वाला है और आबादी में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है।
ठीक यही स्थिति उधम सिंह नगर की है जहां 2011 की गणना के अनुसार मुसलमानों की 33.40 फीसदी हो रही है। यही नहीं रामनगर,कोटद्वार, हल्द्वानी, कालाढूंगी,टनकपुर बनबसा ऐसे शहर चिन्हित हुए है जहां मुस्लिम आबादी दर तीस फीसदी से ज्यादा हर दस साल में बढ़ती जा रही है। इस संख्या में कारपेंटर,राज मिस्त्री, मजदूर, बैंड वादक,बगीचों खेतों में काम करने वाले मजदूरों में की संख्या ज्यादा है। उत्तराखण्ड में मुस्लिमों की बढ़ती आबादी अन्य जिलों में 17 फीसदी के आसपास बढ़ रही है ,बढ़ती आबादी के साथ साथ धार्मिक उन्माद की घटनाएं भी बढ़ रही हैं,उधम सिंह नगर और हरिद्वार जिलो में लव जिहाद की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है यहीं नही पौड़ी गढ़वाल जिले में पिछले दो सालों में मुस्लिम युवकों द्वारा हिन्दू लड़कियों को बहला फुसला कर भगा ले जाने की आधा दर्जन घटनाएं हुई है।
केवल उत्तराखण्ड ही नहीं सीमांत क्षेत्रों में भी यह आबादी बढ़ी है, जिनमें धारचूला भी शामिल है। यही स्थिति लोहाघाट, चंपावत आदि क्षेत्रों की है। नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में मस्जिदों में काफी बढ़ोतरी हुई है। भवाली भीमताल नैनीताल जैसे पर्यटक शहरों में आलीशान मस्जिदें खड़ी हो गई है, इनके लिए भारी भरकम राशि महां से आयी होगी यह चिंता का विषय है।
उत्तराखण्ड में बाहरी प्रदेशों का व्यक्ति 3000 वर्ग फुट से ज्यादा जमीन नहीं ले सकता फिर भी यहां तेजी से मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है। सरकारी ज़मीनों पर कब्जे कर दरगाह और मस्जिद बनाई जा रही हैं। सड़कों के किनारे किनारे तथा वनभूमि पर काबिज लोग मस्जिदों का निर्माण करके उसके आसपास पहले अपने कच्चे फिर पक्के मकान बना रहे हैं।
देवभूमि उत्तराखंड में जिस ढंग से अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी बढ़ी रही है या बढ़ाई जा रही है इसके पीछे सुनियोजित षडयंत्र दिख रहा है। कुछ राजनैतिक दल इसे विशेष रूप से महत्व दे रहे हैं जिसके कारण यह स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

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