दशरथ मांझी, एक ऐसा नाम जो इंसानी जज़्बे और जुनून की मिसाल है. वो दीवानगी, जो प्रेम की खातिर ज़िद में बदली और तब तक चैन से नहीं बैठी, जब तक कि पहाड़ का सीना चीर दिया। आपने इनके किस्से-कहानी फिल्मो में देखी और सुनी होगा। लेकिन आज हम आपको मिलते है असली दशरत मांझी से, जिन्होंने ये साबित किया है की कोई भी काम असंभव नही है। एक इंसान जिसके पास नहीं पैसा था नहीं ताकत थी उसने एक पहाड़ खोदा था, उनकी जिन्दगी से हमें एक सिख मिलती है की हम किसी भी कठीनाई को आसानी से पार कर सकते है अगर आपमें उस काम को करने की जिद्द हो तो। उनकी 22 वर्षो की कठिन मेहनत से उन्होंने एक रोड बनाई जिसका उपयोग आज गांव वाले करते है।
दशरथ मांझी जो बिहार में गया के करीब गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे। उन्होनें केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली। 22 वर्षों के परीश्रम के बाद, दशरथ की बनायी सड़क ने अतरी और वजीरगंज ब्लाक की दूरी को 55 किलोमीटर से 15 किलोमीटर कर दिया।
