Homeराज्यउत्तराखण्डबड़ा खुलासा : सीएम विवेकाधीन कोष में फर्जीवाड़ा करने की कोशिश

बड़ा खुलासा : सीएम विवेकाधीन कोष में फर्जीवाड़ा करने की कोशिश

मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से फर्जीवाड़ा कर कुछ लोग से भी रकम हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। राज्य की गरीब लड़कियों  की शादी, इलाज में असमर्थ के कुछ आवेदनों की जाँच में यह सच्चाई सामने आई है। इस मामले में उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर ऐसे कुछ दलालों की तस्वीरें मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष यूनिट में चस्पा करवाकर उनकी एंट्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

 मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐसे मामले संज्ञान में आने पर सख्त हिदायत दी है कि विवेकाधीन कोष से पैसा जारी किए जाने से पहले प्रत्येक मामले में टेलीफोन के साथ-साथ भौतिक सत्यापन करने की व्यवस्था भी अमल में लाई जा रही है। सीएम ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए यह निर्देश भी दिए हैं कि यदि अब फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से आर्थिक रूप से पिछड़े लोगो को बीमारियों के इलाज, दुर्घटना में मौत, बेटियों की शादी, गरीब छात्रों की पढ़ाई आदि के लिए मदद का प्रावधान है। सूत्रों के मुताबिक इस राहत राशि के लिए कुछ लोगों ने फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया। एक छुटभैया नेता बीते दिनों अपने साथ एक परिवार को लेकर मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस पहुंचा।

उसने बताया कि परिवार बेहद गरीब है और बेटी की शादी होनी है। इसके लिए उसने आर्थिक मदद किए जाने की गुहार लगाई। वह अपने साथ शादी का कार्ड भी लाया। विवेकाधीन कोष से पैसा जारी किए जाने के लिए उसने एक आवेदन किया और साथ में कार्ड की एक कॉपी संलग्न की। शक होने पर विवेकाधीन कोष के प्रभारी ने कार्ड पर दिए नंबरों पर फोन पर जानकारी जुताई , तो मामला फर्जी निकला।

दूसरे मामले में शहर के एक निजी अस्पताल में एक बीमार व्यक्ति का उपचार हुआ, जिसमें मात्र 11 हजार रुपए का खर्च आया। आर्थिक रूप से कमजोर इस व्यक्ति के पास अस्पताल में ही कार्यरत एक एजेंट पहुंचा, जिसने उसे मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से मदद करने की बात समझाई। वह तैयार हो गया। एजेंट ने इस बिल को 11 हजार से बढ़ाकर सीधे एक लाख दस हजार कर दिया। तय हुआ था कि उपचार के खर्च के अलावा जो अतिरिक्त पैसा उसे मिलेगा, उसे दलाल खुद रखेगा।

सीएम के विवेक पर जारी होती है रकम 
विवेकाधीन कोष पूरी तरह मुख्यमंत्री के अधीन होता है। इसमें मुख्य रूप से निर्धन परिवारों को विभिन्न प्रकार से सहायता की जाती है। गरीब परिवार के लोगो की बीमारियों के उपचार के अलावा निर्धन बालिकाओं की शादी, आकस्मिक दुर्घटना में मृत्यु होने, गरीब छात्रों की पढ़ाई के लिए, विधवाओं, दैवीय आपदा, अग्निकांड आदि से जुड़े मामलों पर विचार के बाद धन जारी किया जाता है। वर्ष 2014 में विवेकाधीन कोष के तहत मिलने वाली सहायता का दायरा बढ़ाने पर भी कैबिनेट की सहमति बनी थी। इसके तहत अधिकांश दरों में दोगुना से अधिक वृद्धि की गई थी।

इस फैसले के बाद असहाय दुर्बल वर्ग के व्यक्तियों, निराश्रित व विधवाओं को पांच हजार के स्थान पर दस हजार व बीमारों को पांच हजार के स्थान पर बीमारी की गंभीरता के हिसाब से एक लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दिए जाने की बात तय हुई थी। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष नियमावली में किए गए संशोधन के हिसाब से समाजिक व सांस्कृतिक कार्य करने वाले संगठनों को पांच हजार के स्थान पर पचास हजार, जघन्य हत्या, अपराध व दुर्घटना में कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर 20 हजार रुपए की जगह 50 हजार रुपए की सहायता का प्रावधान किया गया था।

दैवीय आपदा, अग्निकांड आदि में पीड़ित लोगों को 35 हजार रुपए के स्थान पर 50 हजार रुपए, निर्धन बीपीएल में आच्छादित छात्रों को व्यवसायिक कोर्स के लिए 15 हजार के स्थान पर 40 हजार रुपए, इसी वर्ग के छात्रों को विदेश यात्रा के लिए 40 हजार के स्थान पर 50 हजार रुपए, बीपीएल परिवार के लोगों की पुत्री की शादी के लिए 20 हजार के स्थान पर 25 हजार रुपए दिए जाते हैं, बशर्ते उन्होंने समाज कल्याण की किसी और अन्य योजना से यह सहायता न ली हो।

वंही इस मामले पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि विवेकाधीन कोष में कुछ आवेदकों ने गलत तथ्यों के आधार पर पैसा लेने का प्रयास किया था, जिन्हें समय रहते पकड़ लिया गया। ऐसे लोगों को चिन्हित करके उनकी एंट्री प्रतिबंधित की गई है। यह निर्देश भी दिए गए हैं कि आवेदन का सत्यापन करके ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।

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