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प्रधानमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से देश के 9.5 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आठवीं किस्त का अंतरण किया…

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से आज देश के लगभग 9.5 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आठवीं किस्त का अंतरण किया। इसके तहत उन्होंने बटन दबाकर किसानों के बैंक खातों में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से ट्रांसफर की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी वर्चुअल माध्यम से सम्मिलित हुए।
ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत आज ट्रांसफर की गई धनराशि में से प्रदेश के 261.5 लाख किसानों के खातों में कुल 5,230 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि अंतरित की गई है। पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2018-19 में 2,195 करोड़ रुपए, वर्ष 2019-20 में 10,883 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2020-21 में 14,185 करोड़ रुपए, इस तरह अब तक कुल 27,263 करोड़ रुपए प्रदेश के किसानों को प्राप्त हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान देश के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मेघालय, अंडमान व निकोबार तथा जम्मू और कश्मीर सहित अन्य राज्यों के एक-एक किसान से संवाद भी किया। जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, एफ0पी0ओ आदि के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य करने वाले इन किसानों के कार्य की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।
प्रधानमंत्री ने प्रदेश के जनपद उन्नाव के किसान अरविंद कुमार से भी संवाद किया। उन्होंने कुमार से जैविक खेती में रुचि दर्शाने के कारणों के बारे में पूछा। अरविंद कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आयोजित गंगा यात्रा में सम्मिलित होने से उन्हें जैविक खेती की प्रेरणा मिली। इसके पश्चात उन्होंने जैविक खेती व जीवामृत तथा घना जीवामृत बनाने के संबंध में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने अन्य किसानों को भी जीवामृत एवं घना जीवामृत बनाने का प्रशिक्षण दिया।
अब वह अपने गांव में क्लस्टर बनाकर काला नमक चावल, आलू, गेहूं आदि फसलों की खेती कर रहे हैं। साथ ही, एफ0पी0ओ0 का गठन कर अपने उत्पादों की पैकेजिंग कर विपणन भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने अरविंद कुमार को पैकेजिंग के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक के स्थान पर अन्य विकल्पों के प्रयोग का सुझाव देते हुए कहा कि इससे ‘नमामि गंगे’ का मूल भाव पूर्णता को प्राप्त करेगा। ‘मां गंगा’ के दोनों तटों के 05 किलोमीटर के क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे ‘मां गंगा’ में प्रदूषण कम होगा। ‘मां गंगा’ के तटों पर जैविक खेती से प्राप्त उत्पाद ‘नमामि गंगे’ ब्रांड के रूप में उपलब्ध है।

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