कहते है न जो पैदा हुआ है, एक दिन उसका अंत भी तय है, यही कुदरत का नियम है। विज्ञान भी नहीं मानता कि कोई मरने के बाद फिर पैदा हो सकता है। इंसान का पुर्नजन्म भी होता है। लेकिन एक कहानी है, जो विज्ञान की आंख से आंख मिलाकर खड़ी है, जिसके सामने वैज्ञानिकों के सारे तर्क बेमानी दिखाई देते हैं। ये कहानी है कृष्णा की। एक पांच साल के मासूम की, जो कहता है उसने मौत के बाद फिर जन्म लिया है, और जी हां पांच साल का कृष्णा अपने बीवी और दो बेटों से मिलने की रट लगाए है।
यह मामला यूपी के कौशांबी का है जहां एक मां बाप ने 5 साल के बेटे के पुनर्जन्म होने का दावा कर सबको चौंका दिया है.. उनका कहना है कि उनके बेटे का पुर्नजन्म हुआ है। वो अपनी पत्नी-बच्चों का नाम बता रहा है.. इसके अलावा वो अपनी मौत सड़क हादसे में हुई बताता है। 5 साल पहले उनकी पत्नी मनीषा श्रीवास्तव ने एक बेटे को जन्म दिया। बेटे का नाम कृष्णा रखा गया .. लेकिन जैसे कृष्णा बड़ा हो रहा है मां बाप की दिक्कते बढ़ने लगी हैं। कुलदीप बताते हैं- ”वो पहले अक्सर रात को उठकर तोतली आवाज में शांति…शांति…चिल्लाता था, लेकिन हम समझ नहीं पाते थे। अब कृष्णा बोलने लगा है।” ऐसे में वो अपने पिछले जन्म की बाते बता रहा है ”वो कहता है कि उसकी पत्नी शांति है। उसके दो बच्चे भी हैं। वो खुद को अजुहा का रहने वाला बताता है। कहता है कि उसकी मौत 29 जुलाई 2012 को जीटी रोड पर सड़क हादसे में हुई थी.. कुलदीप बताते हैं कि अक्सर रात में नींद से जागकर कृष्णा शांति से मिलवाने की जिद करने लगता है.. कहता है- वो बहुत परेशान होगी। साथ ही वो अपने बेटे जिनका नाम सनी और गुंजन बता रहा है, उनको भी देखने की जिद करता है। कृष्णा कहता है कि उसके बच्चे उसे बहुत प्यार करते हैं।” कृष्णा के पिता कुलदीप कहते हैं कि ”बेटे की हरकतों को पहले हम नजरअंदाज करते रहे.. अब उसकी बात पर यकीन हो रहा है। ऐसे में कई बार मैं उसे अजुहा तक लेकर गया, लेनिक वो पहुंचते ही रास्ता भटक जाता है।”असल में ”पिछले जन्म की वो तमाम बातें बताता है, लेकिन अपना नाम और सही पता नहीं बता पा रहा है। इससे वो खुद भी बहुत परेशान रहता है।”
दूसरी कहानी है टीटू की। एक पांच साल के मासूम की, जो कहता है उसने मौत के बाद फिर जन्म लिया है, जो कहता है कि वो अपने पिछले जन्म के कातिलों को पहचानता है, जो लौटना चाहता है उस जिंदगी में जो बरसों पहले ही खत्म हो चुकी है। आगरा के पास करीब डेढ़ हजार की आबादी वाला एक छोटा सा गांव है इसी गांव में है महावीर प्रसाद का घर, जो पूरे गांव में मास्टर जी के नाम से मशहूर हैं। महावीर प्रसाद का सबसे छोटा बेटा तोरनसिंह उर्फ टीटू के जेहन में कुछ धुंधली सी तस्वीरें कैद हैं।एक दिन लंबी खामोशी के बीच टीटू बहुत कुछ बोल पड़ा। उसने बताया कि उसका नाम तोरन सिंह नहीं सुरेश वर्मा है। उसका घर गांव में नहीं आगरा शहर में है। ये तमाम बातें परिवार के होश उड़ा रही थीं क्योंकि टीटू कभी आगरा गया ही नहीं था। मगर फिर एक दिन वो भी आया जब टीटू ने अपने पिता को पिता और मां को मां मानने से ही इंकार कर दिया।जब पानी सिर के ऊपर चला गया, तो घरवालों ने आगरा में टीटू के बताए रिश्तों को कुरेदने का फैसला किया। 5 साल के टीटू को तलाश थी अपनी पत्नी की, अपने दो प्यारे खूबसूरत बच्चों की, सुरेश रेडियोज की, टीटू की इस कहानी के तार जुड़े थे। आगरा शहर से और उसी कहानी के बिखरे तार जोड़ने के लिए टीटू का भाई अशोक अपने दोस्त के साथ आगरा पहुंच चुका था। आगरा की हर गली, हर सड़क पर सुरेश रेडियोज़ नाम की दुकान तलाशी जाने लगी। और आखिरकार सदर बाजार इलाके में टीटू के भाई की नजर एक दुकान पर टिक गई। टीटू के भाई के सामने थी सुरेश रेडियोज, यानी वही दुकान जिसका ज़िक्र टीटू रोज कर रहा था। लड़खड़ाते कदमों के साथ दोनों दुकान के अंदर पहुंचे। दुकान के काउंटर पर मौजूद थी एक महिला। अशोक ने उस महिला से दुकान के मालिक का नाम पूछा, जवाब मिला सुरेश वर्मा। जिनकी मौत 1986 में हो चुकी थी। दुकान के काउंटर पर जो महिला मौजूद थी उसका नाम था उमा यानी सुरेश वर्मा की पत्नी। टीटू की कहानी, टीटू के सपने, ये सब सुनकर दोनों परिवारों के होश उड़ गए। इन तमाम बातों को बेबुनियाद मानकर बात वहीं खत्म हो गई। अशोक अपने गांव लौट चुका था। लेकिन टीटू की बातें उमा देवी को परेशान कर रहीं थीं। एक टूटी हुई डोर फिर से जुड़ रही थी। न चाहते हुए भी उमा देवी उस टूटे, बिखरे रिश्ते को दोबारा कुरेदने अपने सास ससुर के साथ टीटू के गांव पहुंच गईं। जिन लोग की याद में टीटू बरसों से तड़प रहा था वो लोग अब टीटू के सामने थे। उन लोगों को देखते ही टीटू के चेहरे पर एक अजीब सी हंसी थी और टीटू उनसे ऐसे मिला जैसे कभी बिछड़ा ही न हो। उमा देवी ने बताया कि टीटू ने उन्हें देखकर पहचान लिया। टीटू ने बात की। वो शरमा भी रहा था बात करने में, उसने कुछ ऐसी बातें कहीं कि हमें विश्वास हो गया। उमा देवी और उनके परिवार ने टीटू से कुछ ऐसे सवाल पूछे जिसकी जानकारी सिर्फ सुरेश को थी। लेकिन टीटू हर सवाल का जवाब देता चला गया। उसने ये भी कहा कि वहां मेरे पैसे रखे थे वो भी सच ही था। टीटू के दावों की गहराई परखने के लिए उसे आगरा लाया गया। टीटू पहली बार उस दुकान में पहुंचा जहां टीटू कुछ ऐसे चहलकदमी करने लगा, जैसे ये सब कुछ अपना ही हो।आगरा में टीटू का एक और इम्तिहान लिया गया। उमा देवी ने पड़ोसियों के बच्चों के साथ अपने बेटों रोनू और सोनू को भी उसी भीड़ में बैठा दिया। लेकिन टीटू ने एक झटके में ही उन्हें पहचान लिया।
यह सन 1956 की बात है। दिल्ली में रहने वाले गुप्ताजी के घर पुत्र का जन्म हुआ। उसका नाम गोपाल रखा गया। गोपाल जब थोड़ा बड़ा हुआ तो उसने बताया कि पूर्व जन्म में उसका नाम शक्तिपाल था और वह मथुरा में रहता था, मेरे तीन भाई थे उनमें से एक ने मुझे गोली मार दी थी। मथुरा में सुख संचारक कंपनी के नाम से मेरी एक दवाओं की दुकान भी थी। गोपाल के माता-पिता ने पहले तो उसकी बातों को कोरी बकवास समझा लेकिन बार-बार एक ही बात दोहराने पर गुप्ताजी ने अपने कुछ मित्रों से पूछताछ की। जानकारी निकालने पर पता कि मथुरा में सुख संचारक कंपनी के मालिक शक्तिपाल शर्मा की हत्या उनके भाई ने गोली मारकर कर दी थी। जब शक्तिपाल के परिवार को यह पता चला कि दिल्ली में एक लड़का पिछले जन्म में शक्तिपाल होने का दावा कर रहा है तो शक्तिपाल की पत्नी और भाभी दिल्ली आईं। गोपाल ने दोनों को पहचान लिया। इसके बाद गोपाल को मथुरा लाया गया। यहां उसने अपना घर, दुकान सभी को ठीक से पहचान लिया साथ ही अपने अपने बेटे और बेटी को भी पहचान लिया। शक्तिपाल के बेटे ने गोपाल के बयानों की तस्दीक की।


