
देहरादून । देश दुनिया में नैनीताल झीलों के शहर के लिए मशहूर है। देश दुनिया के पयर्टक प्रतिवर्ष नैनीझील का दीदार करने आते हैं। लेकिन नैनीताल के आस-पास स्थित नकुचियाताल, भीमताल,सातताल, लोहाखामताल, कमलताल, सरियाताल, गरूढ़ताल, नवदयमंतीताल, खुर्पाताल भी सुन्दर झीलों के पयर्टक स्थल हैं लेकिन प्रचार-प्रसार और सुविधाओं का अभाव होने की वजह से पयर्टक इन झीलों की तरफ कम ही आकर्षित होते हैं। यह बात मुख्य विकास अधिकारी विनीत कुमार ने शुर्क्रवार को विकास भवन सभागार में झीलों के संरक्षण की कार्ययोजना बनाये जाने सम्बन्धी बैठक में कहीं।
उन्होंने कहा कि झीलों से प्रदेश एवं जिले का पयर्टन व्यवसाय जुड़ा है जोकि रोजगार का एक बहुत ही प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि नैनीझील के अलावा जनपद की अन्य झीलों के साथ ही गोला तथा कोसी बैराजों के सुन्दरीकरण के लिए कार्ययोजना बनाई जानी है। इसके लिए सिंचाई विभाग तथा खण्ड विकास अधिकारी भीमताल तथा रामनगर बतौर नोडल विभाग कार्ययोजना तैयार करेंगें। कार्ययोजना बनाने में पयर्टन उद्योग, सिंचाई, वन, मत्स्य, लोनिवि, युवाकल्याण, जलसंस्थान, उरेडा, पंचायत, संस्कृति तथाा शिक्षा विभाग भी सहयोग करेगें।
श्री कुमार ने अधिकारियों से कहा कि झीलों के आस-पास अवस्थापना सुविधाऐं तथा सौन्द्रयकरण कार्यों के योजना में शामिल किया जाये। प्रत्येक झील के पास पयर्टकों के लिए ईकों हट, लैंडस्कैप, आधुनिक शौचालय, साइनेजज, नेचरट्रेल,सुन्दर उपवन, कूढ़ा निस्तारण की व्यवस्था झीलों में जल क्रीड़ा, नौकायन के साथ ही पैराग्लाइडिंग, वर्डवाचिंग, सुन्दर एवं आकर्षिक मछलियों का प्रदर्शन को कार्ययोजना में शामिल किया जाय। उन्होंने कहा कि जो स्वयं सहयता समूह झीलों में नौकायन तथा पयर्टन विकास से सम्बन्धित कार्य करना चाहे उन्हें वीर चन्द्र गढ़वाली स्वरोजगार योजना तथा एसजीएसवाई के माध्यम से वित्त पोषण कराया जायेगा। उन्होंन नोडल अधिकारियों से कहा वह पन्द्रह दिन के भीतर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करें ताकि नैनीताल


