देहरादून- त्रिवेंद्र सरकार राज्य के 19वें स्थापना दिवस को इस बार यादगार बनाने जा रही है। जिसको लेकर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। स्थापना दिवस के कार्यक्रम तीन नवंबर से ही आरंभ हो जाएंगे। सप्ताह भर चलने वाले ये कार्यक्रम राजधानी देहरादून से लेकर मसूरी, टिहरी, अल्मोड़ा, श्रीनगर में भी आयोजित होंगे। अलग-अलग थीम पर होने वाले ये कार्यक्रम उत्तराखंड के सैनिकों, महिलाओं, युवाओं पर केंद्रित होंगे, जिनमें राज्य की लोक, परंपरा और संस्कृति की स्पष्ट झलक दिखाई देगी। इन कार्यक्रमों के जरिये सरकार रिवर्स पलायन का संदेश भी देगी। इन कार्यक्रमों में केंद्रीय मंत्री, अलग-अलग क्षेत्रों में नाम कमाने वाले प्रवासी उत्तराखंडी और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शिरकत करेंगे।सरकार हर साल नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस मनाती है लेकिन त्रिवेंद्र सरकार इस बार स्थापना दिवस के जरिये देश भर में निवास कर रहे प्रवासी उत्तराखंडियों को भी रिवर्स पलायन का संदेश देना चाहती है। बता दें उत्तराखंड की स्थापना 9 नवंबर 2000 को हुई थी। 19 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश से अलग हुए उत्तराखंड के 19वें स्थापना दिवस को लेकर प्रदेश सरकार इस बार एक नई पहल शुरू करने जा रही है।
सप्ताह भर मनाए जाने वाले इस आयोजन की थीम रिवर्स पलायन पर आधारित होगी जिसको लेकर उत्तराखंड मूल के देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रसिद्धि प्राप्त प्रवासियों के साथ विचार-विमर्श कर राज्य को गुलजार करने पर चर्चा होगी। राज्य स्थापना सप्ताह को लेकर शासन द्वारा देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा और टिहरी के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह सप्ताह भर होने वाले इन कार्यक्रमों में तय किए गए विभिन्न विषयों पर सामूहिक चर्चा और वैचारिक मंथन पर कार्यक्रम आयोजित करें। बता दें कि अभी तक राज्य स्थापना दिवस पर मुख्य समारोह के साथ कवि सम्मेलन कराए जाने की परंपरा थी, लेकिन त्रिवेंद्र सरकार द्वारा नई पहल के साथ राज्य स्थापना सप्ताह के रूप में किया जा रहा है ताकि उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से मजबूती के साथ जोड़ा जा सके।
वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उत्तराखंड की स्थापना जश्न इस बार अलग अंदाज मनाया जाएगा। मंथन, मनन और समर्पण के तीन मूल मंत्रों के साथ उत्तराखंड को विकास की ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए रोड मैप तैयार करने की कोशिश भी इस बार स्थापना दिवस समारोहों के तहत की जाएगी। हमारी कोशिश है कि लोग अपने छूटे हुए घरों और खेत खलिहानों को सहेजने के लिए वापस लौटें। ये कार्यक्रम इस दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
यह है कार्यक्रम और यहां होंगे आयोजित
3 नवंबर- टिहरी में होगा ‘आवा अपणु घौर’ कार्यक्रम
4 नवंबर- देहरादून में होगा ‘मेरे सैनिक मेरा अभिमान’ कार्यक्रम
6 नवंबर- श्रीनगर में हो ‘महिला सम्मेलन’ समारोह
7 नवंबर- अल्मोड़ा में होगा ‘मेरे युवा मेरी शान’ कार्यक्रम
8 नवंबर- मसूरी में होगा फिल्म कॉन्क्लेव
9 नवंबर- देहरादून में होगा मुख्य समारोह



