चंद महीनों बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बुजुर्ग दो सांसदों पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और भगत सिंह कोश्यारी के चुनाव न लड़ने की संभावनाओं को देखते हुए पार्टी के कद्दावर नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है। इस कड़ी में पहली बार टिहरी लोकसभा सीट से धनौल्टी के पूर्व विधायक और गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष महावीर सिंह रांगर ने चुनाव लड़ने की मंशा जता सियासी गलियारों का माहौल गरमा दिया है।
रांगर का कहना है कि वह टिहरी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में से दो-तिहाई का अलग-अलग विधानसभा सीटों के जरिये प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लिहाजा हर लिहाज से उनकी दावेदारी मजबूत बनती है।
वर्ष 2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की थी। पौड़ी गढ़वाल से भुवन चंद्र खंडूड़ी, टिहरी से महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, हरिद्वार से डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, नैनीताल से भगत सिंह कोश्यारी और अल्मोड़ा सुरक्षित सीट से अजय टम्टा लोकसभा पहुंचे।
जहां तक महावीर सिंह रांगर की दावेदारी की बात हैं तो रांगर की छवि एक साफ़ इमानदार और जनता के साथ कार्य करने वाले नेताओं में रही हैं। धनोल्टी से विधायक का टिकट न मिलने के बाद भी इन्होने भाजपा के लिए कार्य किया ।
स्वास्थ और सवा रोज़गार जैसे विषयों के लिए किये गए कार्यो के लिए महावीर सिंह रांगर को जनता का प्यार पहले भी मिल चुका लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा की भाजपा जो पहले ही साफ़ कर चुकी है की उनकी प्राथमिकता युवा हैं अब रांगर जो न सिर्फ युवा है बल्कि जनता के लिए समर्पित है को टिहरी लोकसभा के लिए चुनेगी या नहीं ?



