
सूर्यदेव को आरोग्य का देवता माना जाता है। सूर्यदेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके जीवन में सफलता, मानसिक शांति पायी जा सकती है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के अन्दर शक्ति का संचार होता है।
सूर्यदेव के किसी भी मंत्र का जाप व्यक्ति को अपनी सुविधा के अनुसार करना चाहिए।सूर्य यश और मान-सम्मान में वृद्धि का करक होता है। अगर आपकी कुंडली में सूर्य शुभ होकर कमजोर है तो किसी भी सुर्यमंत्र का जाप करें। सूर्य के मंत्रों का जाप कम से कम 7000 बार करना चाहिए। विद्वानों के अनुसार सूर्यदेव के मंत्रों का जाप शुक्लपक्ष के रविवार से शुरू करना चाहिए। निर्धारित समय में व्यक्ति इन मन्त्रों का जाप अपनी सुविधा के अनुसार ख़त्म कर सकता है।
सूर्यदेव के मंत्र:
ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च ।
हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन ।।
ऊँ घृणि: सूर्यादित्योम
ऊँ घृणि: सूर्य आदित्य श्री
ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय: नम:
ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नम:
ऊँ घृणि सूर्याय नम:
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।
तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकरम ।।
ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात
ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे।
धीमहि तन्नः सूर्य प्रचोदयात्।।
ऊँ हृां हृीं सः सूर्याय नमः।।
ऊँ घृणिः सूर्य आदिव्योम।।



