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जाने क्यों लगाती हैं विवाहित महिलाएं सिंदूर…

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प्राचीन काल से ही हिन्दू धर्म में कुमकुम या सिन्दूर  को पवित्र माना जाता रहा है। कुमकुम या सिन्दूर ऐसा पदार्थ है जिसे हिन्दू विवाहित स्त्री से अलग नहीं किया जा सकता। प्राचीन काल से ही विवाहित स्त्री अपने माथे पर बिंदी या कुमकुम लगाती आ रही है…

क्यों लगाती हैं विवाहित महिलाएं सिंदूर…

कुमकुम विवाहित हिन्दू स्त्री होने की निशानी: प्राचीन काल से ही विवाहित हिन्दू स्त्री अपने माथे पर कुमकुम को बिंदी की तरह लगाती है और बालों में बीच की मांग में सिंदूर लगाती है। सिंदूर लगाने का तात्पर्य पति की लम्बी आयु और सफलता की कामना करना है।

कुमकुम स्त्री शक्ति का प्रतीक है: विद्वानों के अनुसार लाल रंग शक्ति और उर्जा का प्रतीक है और यह देवी पार्वती या सती की शक्ति का प्रतीक है जो शक्ति का प्रतीक हैं। पौराणिक हिन्दू कथाओं के अनुसार सती एक आदर्श पत्नी थी क्योंकि उन्होंने अपना जीवन अपने पति को समर्पित कर दिया था। प्रत्येक स्त्री को उनका अनुसरण करना चाहिए और इसलिए अपने पति के प्रति श्रद्धा दर्शाने के लिए लिए माथे पर कुमकुम लगाना चाहिए।

कुमकुम का ज्योतिषीय महत्व: हिन्दू ज्योतिषीय विश्वास के अनुसार कुमकुम सौभाग्य या अच्छे भाग्य का प्रतीक है। वास्तव में ऐसा माना जाता है कि माथा मेष राशि का स्थान है और मंगल मेष राशि का राशि स्वामी है। यदि विवाहित महिलायें माथे पर कुमकुम लगाती हैं तो उनका भाग्य अच्छा होता है।

कुमकुम का पौराणिक महत्व: कुमकुम हल्दी और लेड से मिलकर बना होता है। प्राचीन काल से ही ऐसा माना जाता है कि कुमकुम सेक्स की इच्छा को जागृत करता है। यही कारण है कि विवाहित महिलाएं ही कुमकुम लगाती हैं और कुंवारी तथा विधवा महिलाओं को कुमकुम लगाना मना है।

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