भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का चंद्रयान-2 भले ही चांद पर उतरने के दौरान कहीं खो गया हो लेकिन उसका ऑर्बिटर लगातार चांद से जुड़ी अहम जानकारी पृथ्वी पर भेज रहा है। इसरो ने चंद्रयान-2 के आर्टिबर में लगे हाई रिजॉल्यूशन कैमरे से ली गई तस्वीरें जारी की है। इन तस्वीरों में चांद की सतह बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही है। चांद की सतह पर बड़े और छोटे गड्ढे साफ दिखाई दे रहे हैं। इसरो ने ऑर्बिटर में लगे हाई रिजॉल्यूशन कैमरे से जो तस्वीरें जारी की हैं, वह बताती हैं कि ऑर्बिटर बेहतर तरीके से काम कर रहा है। ऑर्बिटर हाई रिजोल्यूशन कैमरा चांद का चक्कर लगाते हुए पृथ्वी पर इसरो को बेहतर तस्वीरें भेजता रहता है।
यह पैंक्रोमैटिक बैंड (450-800 nm) पर संचालित होता है। चंद्रयान-2 के लैंडर और रोवर से चांद की सतह के फिजिकल ऑबजर्वेशन डाटा नहीं मिलने के कारण इसरो ने कहा है कि सोडियम, कैल्शियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, टाइटेनियम और लोहे जैसे तत्वों का पता लगाने के लिए ऑर्बिटर को जैसे काम करना चाहिए, वो वैसे ही काम कर रहा है। इसरो के मुताबिक विक्रम लैंडर की तलाश और उससे संपर्क करने की कोशिशों में जुटी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि अब तक विक्रम से कोई डाटा नहीं मिला है।
7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग से कुछ मिनट पहले ही लैंडर विक्रम का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था। इसके बाद से बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी लैंडर से संपर्क करने की कोशिशें कर रही है हालांकि, चंद्रमा पर रात शुरू होने के कारण 10 दिन पहले इन कोशिशों को रोकना पड़ा था।


