
गोरक्षा के नाम पर हिंसा मचा रहे कार्यकर्ताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 31 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश सरकारों से पूछा कि उनके आदेश पर अमल को लेकर क्या कदम उठाये गये हैं.
कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत बाकी सभी राज्य सरकारों को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नोडल अधिकारी की बहाली और जिला स्तर पर कमेटी बनाये जाने के आदेश पर अमल की रिपोर्ट जमा करने को कहा है. पहले ये फैसला 13 अक्टूबर को सुनाया जाना था पर अब सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी.
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान ही सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने गोरक्षकों के हाथों एक युवक जुनैद की हत्या का मामला उठाया और उसके पिता को रेलवे की तरफ से मुआवजा दिलाने की भी मांग की. इस पर अदालत ने कहा कि किसी भी घटना में पीड़ित को समय रहते मुआवजा देना किसी भी सरकार का दायित्व है. पर इस मामले में मुआवजा पर सुनवाई नहीं हो सकती. इसके लिए अलग से याचिका दाखिल करनी होगी.

याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील दी कि गोरक्षा के नाम पर गोपालकों द्वारा अल्पसंख्यक को सताने की घटनाओं में अब तक सरकारों का रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहा है.
आपको बता दें कि स्वयंभू गोरक्षक समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करेगा. याचिका, सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने दायर की है कि गोरक्षा के नाम पर कुछ लोग और ग्रुप्स पूरे देश में आतंक मचा रहे हैं जिसकी वजह से समाज में एक दुसरे समुदाय के बीच तल्खी पैदा हो रही है. यह तक की खुद प्रधानमंत्री को इन स्वयंभू गोरक्षकों को फर्जी और समाज को तोड़ने वाला बताना पड़ा.



