रूड़की; जहां एक ओर तो केन्द्र सरकार बच्चों के भविष्य सुधारने के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाकर करोड़ों रूपय खर्च कर रही है लेकिन वहीं भीख मांगने वाले बच्चे इन सब योजनाओं से महरूम हैं भीख मांगने के साथ साथ यह बच्चे चोरी व नशा जैसी लत मे फसकर बर्बाद हो रहे हैं। पिरान कलियर में बढते इस कृत्य को रोकने में जिला प्रशासन व संबधित विभाग पूरी तरह नाकाम साबित होती नजर आ रही है। प्रदेश में गठित बाल संरक्षण आयोग ने कभी कलिसर की ओर आकर देखने तक की जहमत नही उठाई।
बताते चलें कि विश्व प्रसिद्व पिरान कलियर में भीख मांगना एक बड़ा कारोबार बनता जा रहा है बाहर से आकर जुग्गी झोपडीयों में रह रहे सैकड़ों परिवार अपने बच्चों को भीख मांगने को मजबूर कर रहे हैं , बच्चों के भविष्य को लेकर न तो मां बाप को कोई चिन्ता है और न ही जिला प्रशासन गम्भीर है। वहीं शिकायत मिलने पर श्रम विभाग के अधिकारी भी महज रस्म अदायगी कर लौट जाते हैं ।

