देहरादून – उत्तराखंड में इन दिनों एक नए मुद्दों को लेकर सियासी जंग छिड़ गई है मामला राज्य के विकास से जुड़ा है जिन सियासतदानों से जनता को उम्मीदें होती हैं वो लोग क्षेत्र में ही ना आए तो फिर विकास कैसा। जी हां मुद्दा राज्यसभा सांसद को लेकर विकास से जुड़ा है क्योंकि सालों से माननीय सांसद उत्तराखंड आए ही नहीं है।
उत्तराखंड में राज्यसभा की तीन सीटें हैं जिन पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों का कब्जा है तीन सीटों में से दो पर कांग्रेस काबिज है तो एक सीट पर हाल ही में भाजपा ने कब्जा जमाया है। तीन राज्यसभाा सांसदों में से दो सांसद उत्तराखंड के ही मूल निवासी हैं तो एक सांसद उत्तराखंड से बाहर के हैं। बात कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राज बब्बर की करते है। जो 13 मार्च 2015 को उत्तराखंड से निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुने गए। सांसद बनने के बाद राज बब्बर तीन साल में बमुश्किल दो या तीन बार ही उत्तराखंड आए होंगे। एक जब वह निर्वाचित हुए थे और एक कभी किसी कार्यक्रम में। जब इस बारे में कांग्रेस जिला अध्यक्ष लाल चंद शर्मा से पूछा गया तो उन्होंने कहा की उनके पास यूपी के प्रदेश अध्यक्ष का भी पदभार है इसलिए समय की कमी के चलते नहीं आ पाते।
वहीँ अब इस मौके को देख भाजपा को भी कांग्रेस पर तंज कसने का मौका मिल गया। लगे हाथ बीजेपी प्रवक्ता वीरेंन्द्र बिष्ट ने भी कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा की ये तो कांग्रेस का कल्चर है कि वह जनता से वादा कर भूल जाते हैं और यही कर रहे हैं उनके राज्यसभा सांसद राज बब्बर। जबकि भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने सांसद बनते हैं प्रदेश की जनता के लिए कई सौगात दे दी है। लेकिन कांग्रेस के सांसद पिछले 3 सालों से नजर ही नहीं आ रहे अब तो उन्हें दिये के सहारे ही ढूंढना होगा।