
देहरादून। उत्तराखंड सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसके कारण विधायकों और मंत्रियों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज मुख्यमंत्री से जमकर नाराज चल रहे हैं। यही कारण है कि वह समय-समय पर अपनी नाराजगी प्रकट भी कर चुके हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री कुछ मंत्रियों के साथ अलग हैं तो अन्य मंत्री उन्हें हाशियें पर करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज जो पर्यटन के साथ धर्म और संस्कृति मंत्री भी है केदारधाम और बदरीधाम के कपाट खुलने पर वहां नहीं पहुंचे जो इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं उनकी नाराजगी और बढ़ रही है। इस संदर्भ में जब सतपाल महाराज से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि व्यस्तता के कारण वह वहां नहीं जा पाए लेकिन उनका मन वहीं था। नाराजगी के एक नहीं कई बार ऐसे प्रमाण मिले हैं जो मुख्यमंत्री और सतपाल महाराज के बयानों में काफी अंतर रहा है। मुख्यमंत्री ने कुछ कहा और सतपाल महाराज ने कुछ और कहा जो यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
सतपाल महाराज ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाई और लगने लगा था कि वह मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार है लेकिन सरकार बनने पर यह दायित्व त्रिवेंद्र सिंह रावत को दिया गया और महाराज जी को वरिष्ठतम मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। और तब से वह मन से लगातार नाराज है और समय समय पर इसका इजहार भी करते रहते हैं। धामों के कपाट खुलने के अवसर पर उनका न जाना तथा विदेशों से होने वाले अनुबंधों के अवसर पर न रहना उनकी नाराजगी का ही संकेत है। कारण भले ही कुछ और लेकिन यह नाराजगी धीरे-धीरे और बढ़ रही है।


