शैली श्रीवास्तव:
“रामभक्त हनुमान” जी की चर्चा केवल भारत में ही नही बल्कि दुनिया भर में होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध कर रहे वैज्ञानिक भी हनुमान जी के बल एवं उनकी शक्तियों पर काम करते रहते हैं। वे हनुमान जी के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं। उनसे जुड़ी पौराणिक कहानियों पर भी रिसर्च किया जाता है। हनुमान जी पर टीवी सीरियल एवं कार्टून फिल्में एवं शो भी बनाए जाते हैं, ताकि बच्चे भी उनकी कहानी को जान सकें, लेकिन हम आज आपकों हनुमान जी से जुडी वो कहानी बताने जा रहे है जो अपने पहले कभी नहीं सुनी होगी। अपने रामयण में हनुमान जी के संजीवनी बूटी लाने का किस्सा तो सुना ही होग, दरसल यह कहानी उसी से जुड़ी है पर जिसका जिक्र रामयण में भी नहीं है।
हम सब जानते है हनुमान जी हिन्दुओं के प्रमुख आराध्य देवों में से एक है, और सम्पूर्ण भारत में इनकी पूजा की जाती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते है की हमारे भारत में ही एक जगह ऐसी है जहां हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ के रहवासी हनुमान जी द्वारा किए गए एक काम से आज तक नाराज़ हैं। यह जगह है उत्तराखंड का द्रोणागिरि गांव।
द्रोणागिरि गांव उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ प्रखण्ड में जोशीमठ नीति मार्ग पर है। यह गांव लगभग 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। दरसल इस गांव के लोग हनुमान जी की एक बात से इतना नाराज है कि उनकी पूजा नहीं करते और ये नाराजगी आज से नहीं बल्कि उस समय से जब बजरंगबली ने संजीवनी बूटी के लिए पूरा पहाड़ उठा लिया था।
जब मेघनाद के वार से जब लक्ष्मण बेहोश हो गए थे तो उन्हें होश में लाने के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत पड़ी थी और हनुमान बूटी लेने चमोली जिले के द्रोणगिरी पर्वत पर पहुंचे थे। इसी पर्वत की तलहटी में यह द्रोणगिरी गांव बसा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान जब बूटी लेने आए तो गांव की एक वृद्ध महिला ने उन्हें पर्वत का वह हिस्सा दिखाया, जहां बूटी उगती थी और भगवान हनुमान संजीवनी के बदले पूरा पर्वत ही अपने साथ ले गए। इसी बात से नाराज होकर यहां के लोग उनकी पूजा नहीं करते। यहां तक कि इस गांव में लाल रंग का ध्वज लगाने पर भी पाबंदी है। माना जाता है कि पर्वत ले जाने से नाराज वहां के लोगों ने उस वृद्ध महिला का भी समाज से बहिष्कार कर दिया। वैसे इस गांव में भगवान राम की पूजा बड़ी धूमधाम से होती है। यहां के लोग हर वर्ष द्रोणगिरी की पूजा करते है, लेकिन इस पूजा में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता क्योंकि एक महिला ने ही द्रोणगिरी पर्वत का वह हिस्सा दिखाया था, जहां संजीवनी बूटी उगती थी।
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