दो सितंबर को गाजे-बाजे के साथ गणपति बप्पा का स्वागत पूरे देश में होगा। इसके लिए तैयारियां शुरू भी हो चुकी हैं। अधिकतर जगहों पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कर 10 दिन तक धूमधाम से उत्सव मनाया जाएगा। मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन गजानंद की स्थापना करने से विघ्नों से मुक्ति मिल जाती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अमृत चौघड़िया में सुबह 6:10 से 7:44 तक और अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:01 से 12:55 तक मूर्ति स्थापना करना शुभ होगा।
चौघड़िया अनुसार
शुभ चौघड़िया – सुबह 9:18 से 10:53 तक।
लाभ चौघड़िया – दोपहर 3:35 से 5:09 तक।
अमृत चौघड़िया – शाम 5:09 से 6:53 तक।
देर रात मुहूर्त – रात्रि 11:01 से 12:27 तक।
लग्नानुसार गणेश स्थापना मुहूर्त
सिंह लग्न सुबह 5.03 से 07:12 तक।
कन्या लग्न सुबह 7:12 से 9:16 तक।
धनु लग्न दोपहर 1:47 से 3:53 तक।
कुंभ लग्न शाम 5:40 से 7:09 तक।
मेष लग्न रात्रि 8:43 से 10:24 तक।
गणेश चतुर्थी के लिए लोगों ने खरीददारी करना शुरू कर दिया है। लेकिन, बप्पा की सूंड किस तरफ होना चाहिए, प्रतिमा खड़ी हुई होना चाहिए या बैठी हुई आदि बातों को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है। वहीं ज्योतिषाचार्यों की मानें तो दोनों ही तरफ की सूंड वाले गणेशजी की स्थापना शुभ होती है।
बैठी मुद्रा में लें प्रतिमा
बाईं तरफ की सूंड की प्रतिमा लेना ही शास्त्र सम्मत माना गया है। दाईं तरफ की सूंड की प्रतिमा में नियम-कायदों का पालन करना होता है। प्रतिमा हमेशी बैठी हुई मुद्रा में ही लेनी चाहिए। क्योंकि खड़े हुए गणेश को चलायमान माना जाता है।
बाईं सूंड वाले गणेश जी
यदि सूंड प्रतिमा के बाएं हाथ की ओर घूमी हुई हो तो उन्हें वक्रतुंड कहा जाता है। इनकी पूजा-आराधना में बहुत ज्यादा नियम नहीं रहते हैं। सामान्य तरीके से हार-फूल, आरती, प्रसाद चढ़ाकर भगवान की आराधना की जा सकती है। पंडित या पुरोहित का मार्गदर्शन न भी हो तो कोई अड़चन नहीं रहती।
दाईं सूंड वाले गणेशजी
सिद्धि विनायक का पूजन करते समय भक्त को रेशमी वस्त्र धारण कर नियम से सुबह-शाम पूजा करनी चाहिए। सूती वस्त्र पहन कर पूजन नहीं करते हैं। पुजारी या पुरोहित से पूजा कराना शास्त्र सम्मत माना जाता है। भक्त को जनेऊ धारण कर उपवास रखना होता है। स्थापना करने वाले को इस दौरान किसी के यहां भोजन करने नहीं जाना चाहिए।



