सीएम योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर स्थित मेडिकल कॉलेज में पिछले 24 घंटों के अंदर 30 से ज्यादा मासूमों की मौत का मामला गर्माता जा रहा है. वही अब तक 63 मौतें हो चुकी हैं. लोग सड़कों पर उतर आये हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग कर रहे हैं. जहां मीडिया में इन मौतों का कारण ऑक्सीजन सप्लाई बंद होना बताया जा रहा है, वहीँ डीएम राजीव रौतेला इसे सामान्य मौतें बता रहे हैं. वही इस पूरी खबर में एक और ट्विस्ट आया है –

खुलासा हुआ है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई खत्म होने की बात कई दिनों पहले ही पता लग चुकी थी, लेकिन वो पहले ही गोरखपुर से दिल्ली भाग गए.
इसी डर से राजीव मिश्रा ने मेडिकल कॉलेज कैंपस में भी अघोषित बैन लगाया हुआ था. इसके अलावा जब दो दिन पहले मीडिया ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से जब बजट के अभाव में ऑक्सीजन की सप्लाई के बारे में सवाल किया था, तब उन्होंने झूठ बोलते हुए कह दिया कि ऑक्सीजन का बजट आ गया है, जल्दी ही भुगतान कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन गैंस सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में हैं.

हालांकि 10-11 अगस्त की रात मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी गई. तथ्यों के मुताबिक़ बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स को पिछले काफी वक़्त से भुगतान किया ही नहीं जा रहा था. पुष्पा सेल्स का लगभग 70 लाख रुपये बकाया था, जबकि कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक़ बकाया रकम की अधिकतम मियाद 10 लाख रुपये ही है.

बकाया भुगतान करने के लिए पुष्पा सेल्स की ओर से सप्लाई ठप करने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी थी. भुगतान के लिए पुष्पा सेल्स के अधिकारियों ने महानिदेशक चिकित्सा-शिक्षा व डीएम को पत्र भी लिखा था. जिसके बाद भी भुगतान ना होने पर सप्लाई रोक दी गयी. गुरुवार को सेंटर पाइप लाइन ऑपरेटर ने प्रिंसिपल, एसआईसी, एचओडी एनेस्थिसिया, इंसेफेलाइटिस वार्ड के नोडल ऑफिसर को बाकायदा लिखित में लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई का स्टाक बेहद कम होने की जानकारी भी दी थी

गुरुवार को लिक्विड आक्सीजन की रीडिंग 900 पर पहुंच चुकी थी. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2 साल पहले ही लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था. मेडिकल कॉलेज और पुष्पा सेल्स के बीच ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर हुए करार की शर्तों के मुताबिक़ बकाया राशि की अधिकतम लिमिट 10 लाख रुपये ही हो सकती थी.
पुष्पा सेल्स के ऑफिसर दिपांकर शर्मा ने पत्र लिखकर बताया भी था कि, कालेज प्रशासन लगातार करार की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है और पैसे नहीं दे रहा है. कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक़ कालेज प्रशासन को बिल मिलने के 15 दिन के अंदर रकम का भुगतान करना है लेकिन पिछले 6 महीने से उधार की गैस इस्तमाल की जा रही थी और बकाया रकम के भुगतान के लिए पत्राचार चल रहा था.

गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला के मुताबिक इस समय बकाया राशि लगभग 70 लाख रूपये हो चुकी थी और 35 लाख रूपये का भुगतान किया जा चुका था. हालांकि अभी तक भुगतान पुष्पा सेल्स के अकाउंट में ट्रान्सफर नहीं हुआ था. डीएम के मुताबिक़ उन्होंने पुष्पा सेल्स से वादा किया था कि वो भुगतान करा देंगे और उनसे ऑक्सीज़न सप्लाई न रोकने की रिक्वेस्ट की थी.

पुष्पा सेल्स ने 40 लाख रुपये के तुरंत भुगतान की मांग की. पुष्पा सेल्स के दीपांकर शर्मा ने पत्र लिख कर आगाह किया था लिक्विड ऑक्सीजन को देहरादून की आईनॉक्स कंपनी से खरीदा जाता है, इसलिए वो बकाया राशि के भुगतान के बाद ही ऑक्सीजन सप्लाई चालू रख सकेंगे. अब सवाल ये उठ रहे हैं कि जब 70 लाख का बकाया हो चुका था तो प्रिंसिपल ने इसकी जानकारी सरकार को क्यों नही दी? इस मामले में जब प्रिंसिपल राजीव मिश्रा से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल बंद आया. इसके बाद खबर आयी कि स्थित बिगड़ने के डर से राजीव मिश्रा गोरखपुर से दिल्ली भाग चुके हैं.

वही पीएमओ की तरफ से भी केंद्र दबाव बना रही है और निगरानी कर रही है . पर जो लापरवाही हुई उसकी कीमत आम जनता ने चुकाई .

सवाल हैं कि क्या योगी सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसा किया गया? आखिर सरकार को जानकारी क्यों नहीं दी गयी? वही इस पूरे मामले के पीछे राजनीतिक साजिश होने की बू आ रही है. अब देखना ये होगा की इस स्थिति से योगी सरकार कैसे निपटती हैं और क्या हल निकालती हैं , जहा कई मासूमो की जिंदगी का सवाल हो , वहा सरकार को जल्दी हरकत में आना चाहिए तो अभी तक इतनी लापरवाही क्यों की गयी .


