
देहरादून। उत्तराखंड के सूचना, कौशल विकास समेत कई प्रमुख विभागों का काम देख रहे डॉ. पंकज पांडेय की कार्यशैली कुछ लोगों को खलने लगी है। इसका प्रमाण अतिक्रमण हटाओ अभियान द्वारा उनके गेट पर लगाया गया लाल निशान है जिसको लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। डॉ. पंकज पांडेय सपरिवार पारिवारिक कारणों से शहर से बाहर थे। उनकी इसी अनुपस्थिति का लाभ उठाकर उनके विरुद्ध तरह-तरह की चर्चाएं सोशल मीडिया पर प्रारंभ कर दी गईं और उनको बदनाम करने की पूरी कोशिक की गई। इसके पीछे कुछ ऐसे लोगों का हाथ हो सकता है जो उनके भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाई जा रही मुहिम का विरोध करते हैं। डॉ. पंकज कुमार पांडेय के विरुद्ध पिछले कुछ दिनों से लगातार योजनाबद्ध तरीके से कुछ लोग सोशल मीडिया पर समाचार प्रकाशित कर उनको बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। इसके पीछे यह भी माना जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री के प्रिय अधिकारियों में गिने जाते हैं और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उन पर भरोसा करने लगे हैं तथा मुख्यमंत्री के साथ कई मंचों पर दिखे हैं। मुख्यमंत्री ने कौशल विकास के कार्यों के लिए उनकी कई बार पीठ भी थपथपाई है, यह भी लोगों की आंखों में खटकने का एक कारण हो सकता है। कौशल विकास ने जहां देश में प्रदेश के कार्यों का लोहा मनवाया है वहीं विदेश में भी उत्तराखंड कौशल के कार्यों की चर्चा हुई है। वैसे भी डॉ. पांडेय ने अपने विभागों में अधिकारियों की मनमानी बंद करा दी हैै जिसके कारण वह कुछ लोगों को अखर रहे हैं। डॉ. पंकज पांडेय के आवास के गेट पर लाल निशान लगाया जाना सुर्खियों का विषय बन गया जबकि डॉ. पांडेय ने बाहर से लौटने के बाद यह स्पष्ट कर दिया है कि वह स्वत: अतिक्रमण की परिधि में आ रहा क्षेत्र मुक्त करा देंगे।

उन्होंने कहा है कि वह न्यायालय का पूर्ण सम्मान करते हैं और न्यायालय के आदेशों का अक्षरश: पालन किया जाएगा। डॉ. पांडेय ने स्पष्ट किया है कि जहां लाल निशान लगा है वह अतिक्रमित क्षेत्र को स्वत: मुक्त करा देंगे। इससे पहले सोशल मीडिया में यह चर्चा थी कि लाल निशान को हटाया गया है, जबकि डॉ. पांडेय देहरादून में थे ही नहीं।