Homeराज्यउत्तराखण्डमेडिकल कॉलेज पर मरीजों को मारने का आरोप!

मेडिकल कॉलेज पर मरीजों को मारने का आरोप!

बड़ी खबर, देहरादून:  मेडिकल कॉलेज पर मरीजों को मारने का आरोप
प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची शिकायत, स्वास्थ्य निदेशालय जांच के नाम पर मामले को टाल रहा है
लोगों की सुविधा के लिए बनाये गए संस्थान दुविधा का कारण बनते जा रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज से लिया जा सकता है जो वर्तमान में रोगियों को रोगमुक्त करने के बजाय उन्हें रोगयुक्त तथा अन्य बीमारियां बांटने का काम कर रहा है। चाहे-अनचाहे इस मेडिकल कॉलेज में रोगियों को लूटने खसोटने का काम तो चल ही रहा है, उनकी लूट खसोट के साथ-साथ उन्हें हर तरह से हतोत्साहित किया जा रहा है। इसी तरह का एक प्रकरण अब प्रधानमंत्री के दरबार तक पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री कार्यालय की पहल के बाद अब इस मामले पर लीपापोती का काम जारी है।
श्रीमती कृष्णा वर्मा जो एम्स में वर्षों से चिकित्सा करवा रही थी को सामान्य बीमारी के कारण श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा। जहां चिकित्सकों ने एम्स द्वारा दी गई एक दवा बंद कर दी गई। इसके बंद करने से रोगी को अपनी जान देनी पड़ी। इस संदर्भ में जब मृतका के पति एसके वर्मा द्वारा उच्चाधिकारियों को लिखा गया तो मामले को दबाने का प्रयास किया गया। लेकिन जब उन्होंने इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा और वहां से दबाव आया तब इस मामले की जांच प्रारंभ हुई। अपर निदेशक चिकित्सा उत्तराखंड को मुख्य चिकित्सा अधिकारी टीसी पंत द्वारा दिनांक छह-सात अक्टूबर 2017 को एक पत्र भेजकर श्री वर्मा द्वारा श्री महंत इन्दरेश पटेल नगर के उपर की गई जांच की आख्या भेजी गई, जिसमें मुख्य चिकित्साधिकारी टीसी पंत ने माना कि श्री एस के वर्मा 9 खुड़बुड़ा मोहल्ला के शिकायती पत्र की जांच डॉ. केके सिंह अपर मुख्य चिकित्साधिकारी द्वितीय तथा डॉ. हरीश बसेड़ा, नेफरोलॉजिस्ट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मसूरी व डॉ. एनएस नपलच्याल की टीम से इस प्रकरण की जांच कराई गई। पत्र में लिखा गया है कि प्रश्नगत प्रकरण की जांच में चिकित्साधीक्षक श्री महंत हॉस्पिटल पटेलनगर द्वारा 21 मार्च से 26 मार्च 2017 तक दस हजार 380 रुपये का बिल बनाया गया परन्तु 27 मार्च 2017 को 33 सौ रुपये ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए श्री वर्मा से लिए गये थे जो पूरी तरह गलत है। चिकित्साधीक्षक महंत इन्दरेश हॉस्पिटल द्वारा अपनी गलती स्वीकार की गई है। इस प्रकरण में अभिलेखों का सही रख-रखाव भी नहीं पाया गया जो बड़ी लापरवाही प्रदर्शित करता है। यह पत्र पत्रांक 0567 सीएमओ जांच 2017-18 के माध्यम से भेजा गया था।
तीन अधिकारियों द्वारा की गई इस जांच में भी लीपापोती का प्रयास किया गया है। इस मामले में मृतका के पति एसके वर्मा का कहना है कि उनकी पत्नी का निधन 26 मार्च 2017 की रात्रि 11.55 बजे हो गया था। उनको स्टूल तथा यूरिन में रूकावट के कारण 23 मार्च 2017 को महंत हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। गॉयनिक विभाग के चिकित्सकों ने यह समस्या दूर कर दी। उन्हें मेडिसन विभाग के बेड नं. 5 पर बिना मरीज की इच्छा के स्थानान्तरित कर दिया गया और उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। श्री वर्मा ने कहा कि मैंने इस घटना को महामहिम राज्यपाल तथा प्रधानमंत्री को निष्पक्ष जांच कराने को लिखा, जिस पर प्रधानमंत्री कार्याकयल की ओर से प्रमुख सचिव उत्तराखंड को ऐसे ही निर्देश दिए गए।
श्री वर्मा का कहना है कि इस प्रकरण पर स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा एक जांच समिति गठित की गई, जिसमें डॉक्टर केके सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय चिकित्सकों ने उनसे भी चर्चा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि चिकित्सालय के चिकित्सकों ने मनमर्जी से उनका इलाज किया, जबकि श्रीमती वर्मा का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा था। चिकित्सकों ने पीजीआई की दवाओं को नजरअंदाज कर अनावश्यक रूप से उनके आश्रित को मार दिया। उन्होंने कहा कि खून की कमी को दूर करने के लिए पीजीआई द्वारा हाइड्रा 500 एमजी की दवा अप्रैल 2016 से उन्हें लगातार दी जा रही थी तथा उनको हल्की दवाएं देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने हाइड्रा 500 एमजी बंद करके वीनट 400 एमजी उपचार के लिए मंगवाई जिसका भी भुगतान मैंने 1000 किया। इस दवा के बाद ही श्रीमती वर्मा की तबियत बिगड़ गई तथा उनका रक्तचाप गिरा और उनका असामयिक निधन हो गया।
श्री वर्मा का कहना है कि उन्होंने अपना बयान इस टीम को दिया था और जांच में पूरा सहयोग किया लेकिन जो जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय उत्तराखंड में जमा कराई गई है उसमें उनका बयान नहीं है।
उनका कहना है कि इस प्रकरण की जांच में लीपापोती हुई है और श्री गुरु राम राय चिकित्सकों को बचाने की कोशिश की गई है जो इस चिकित्सक दल की सोची-समझी साजिश हो सकती है। इस संदर्भ में अपर निदेशक स्वास्थ्य एसपी अग्रवाल का कहना है कि उन्हें अब तक अंतिम जांच नहीं मिल पाई है जिसके आधार पर अग्रिम कार्यवाही की जाए। इस संदर्भ में वे अंतिम जांच की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यहां उल्लेख करना आवश्यक होगा कि मेडिकल कॉलेज में आये दिन इस तरह की घटनाएं हो रही है जिसका परिणाम बीमारों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। इस संदर्भ में जब स्वाथ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव से संपर्क का प्रयास किया गया  गया तो उन्होंने कहा कि वह बैठक में है अभी भेंट नहीं कर पाएंगी जिसके कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका।
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