बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारी न केवल अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हैं, बल्कि विभागीय कार्यों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि सभी गंभीर बीमारियों से ग्रसित अधिकारियों की पहचान की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही, उन्होंने विद्यालयों के दुर्गम और सुगम श्रेणी के कोटिकरण का पुनर्निरीक्षण करने की भी बात की। कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों में समायोजित करने की प्रक्रिया को भी तेज करने का आदेश दिया गया।
मंत्री ने यह भी कहा कि जिन विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, उन्हें दो महीने के भीतर बिजली, पानी, शौचालय, फर्नीचर और पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, दान में मिली भूमि की रजिस्ट्री भी विभाग के नाम करने की बात कही गई।
यह बैठक शिक्षा विभाग के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उम्मीद की जा रही है कि इस बदलाव से न केवल विभागीय कार्य में सुधार होगा, बल्कि छात्रों को भी बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। शिक्षा मंत्री की इन पहलों से साफ होता है कि अब समय आ गया है कि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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